अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
आरक्षण आंदोलन के दौरान जाट आरक्षण संघर्ष समिति को मिले चंदे की राशि पर रार थमने का नाम नहीं ले रही है। इसको लेकर राष्ट्रीय महासचिव अशोक बल्हारा के नेतृत्व में सोमवार को समिति के एक गुट की मीटिंग जाट धर्मशाला में हुई। इसमें जिलाध्यक्ष वीरभान ढुल और उनके समर्थक गायब रहे। मीटिंग में पुरानी कमेटी को भंग करने के साथ-साथ नई कार्यकारी कमेटी भी बनाई गई। कमेटी को जल्द ही नई कमेटी के गठन के लिए भी कहा गया है। इसके बाद नई कमेटी ही चंदे की बची राशि पर फैसला करेगी। वहीं नौ जुलाई को उचाना में समिति का कार्यक्रम होगा। इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक भी शिरकत करेंगे। इसके बाद नई कार्यकारिणी का गठन होगा।
गौरतलब है कि आरक्षण आंदोलन के आए चंदे के 37,85,522 रुपये बचे हैं। यह राशि फिलहाल जाट सेवा संघ ट्रस्ट के खाते में है। इस पर निवर्तमान जिलाध्यक्ष वीरभान ढुल और उनके समर्थक ऐतराज जता रहे हैं। इनका कहना है कि राशि जाट आरक्षण संघर्ष समिति के पास ही होनी चाहिए। इसको लेकर दो गुट बने हैं। हालांकि दोनों ही गुटों ने जिले का पैसा जिले पर रखने का निर्णय लिया है।
निष्ठा पर उठे सवाल
मीटिंग के बाद राष्ट्रीय महासचिव अशोक बल्हारा ने कहा कि निवर्तमान जिलाध्यक्ष वीरभान ढुल ने संगठन की नीतियों में विश्वास जताना बंद कर दिया। ऐसे में उनको संगठन में बनाए रखना सही नहीं है। बल्हारा ने कहा कि चार जून को रोहतक में हुई मीटिंग में वीरभान ढुल एजेंडा के खिलाफ बोले। दस जून की मीटिंग में वे बिना बताए ही मीटिंग छोड़कर चले आए। इसके बाद 23 जून को केंद्रीय पर्यवेक्षक भेजे गए, लेकिन वीरभान ढुल मीटिंग में नहीं पहुंचे ओर समानांतर दूसरी मीटिंग की। 25 जून को फिर से मीटिंग कर समिति के एजेंडा से अलग चले। ऐसे में उनको जिलाध्यक्ष कैसे रखा जा सकता है।
जिला कार्यकारिणी करेगी फैसला
अशोक बल्हारा ने कहा कि फिलहाल 11 सदस्यों की एडहॉक समिति बना दी। उसके जिला संयोजक के तौर पर बरसोला निवासी सेवानिवृत्त कैप्टन वेदप्रकाश नियुक्ति की घोषणा कर दी गई है। अब नए जिलाध्यक्ष सहित पूरी कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा।
सरकार पर भी साधा निशाना
महासचिव अशोक बल्हारा ने कहा कि प्रदेश के दो मंत्री समिति को दो फाड़ करना चाहते हैं, ताकि जाट आरक्षण आंदोलन की हवा निकाली जा सके। हालांकि बल्हारा ने मंत्रियों के नामों का खुलासा तो नहीं किया, लेकिन यह जरूर चेताया कि अभी समिति ने अपना आंदोलन स्थगित किया है, पूरी तरह से समाप्त नहीं किया।
मीटिंग के बाद भिड़े दो नेता
जाट धर्मशाला में जिस समय मीटिंग के बाद दोनों गुटों के दो नेताओं के बीच कहासुनी हो गई। हालांकि समिति की मीटिंग दूसरी मंजिल पर चल रही थी। इस दौरान मीटिंग में शामिल एक नेता जैसे ही बाहर निकला, दूसरे गुट के एक नेता ने उस पर टिप्पणी कर दी। इस पर दोनों के बीच कहासुनी हुई। हालांकि नौबत हाथापाई तक की आ गई थी, लेकिन यहां मौजूद लोगों ने इससे पहले ही दोनों को अलग-अलग कर दिया।
मुझे कार्यकारिणी भंग करने की सूचना मिल गई है, लेकिन मीटिंग के विस्तृत प्रारूप की जानकारी नहीं है। इसका पता लगा कर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। -वीरभान ढुल, निवर्तमान जिलाध्यक्ष, जाट आरक्षण संघर्ष समिति।
जाट आरक्षण संघर्ष समिति में चंदे की रार, जिला कार्यकारिणी भंग
कैप्टन वेदप्रकाश बने कार्यकारी प्रधान, अब नई कमेटी करेगी पैसे पर फैसला
नौ जुलाई को यशपाल मलिक पहुंचेंगे उचाना