डीसी से बोले मंत्री बीरेंद्र सिंह, जो लोग आयुष्मान योजना के तहत आ सकते हैं, उन्हें करें शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘आयुष्मान भारत’ का रविवार को जींद में शुभारंभ केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने किया। नागरिक अस्पताल से शुरू की गई योजना का जिले के करीब 80 हजार परिवारों के सवा चार लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा। केंद्रीय मंत्री ने डीसी अमित खत्री से कहा कि ओर भी जो लोग इस योजना के पात्र हैं, उन्हें इसमें शामिल किया जाए। मंत्री ने लोगों से आह्वान किया वे इस योजना को नाजायज लाभ न उठाएं।
उन्होंने कहा कि कुछ डॉक्टर व मरीज मिलकर गड़बड़ करते हैं। ठेठ देसी लहजे में उन्होंने कहा कि कई बार तो किसी को कांटा लगाना होता है तो डॉक्टर लिख देता है कि इसे तो राड पड़ रही है। इस प्रकार 400 रुपये के इलाज को 40 हजार रुपये का बिल बना लिया जाता है। यह सही नहीं है। यह योजना देश को बदलने के लिए है और हर व्यक्ति को इसमें सहयोग देना चाहिए। उन्होंने कहा कि निजी अस्पताल सिर में दर्द होने पर भी मिर्गी का इलाज शुरू कर देते हैं। इससे बचने की जरूरत है।
इस मौके पर डीसी अमित खत्री, एडीसी मुनीष नागपाल, एमएस डॉ. राजेश भोला, डॉ. पालेराम कटारिया, डॉ. रमेश पांचाल, जवाहर सैनी, अमरपाल राणा, एचपीएससी के सदस्य जयभगवान गोयल, हाउसिंग बोर्ड फेडरेशन के चेयरमैन ओपी पहल, स्टील बोर्ड के सदस्य शिव नारायण शर्मा, डॉ. राज सैनी, स्वामी राधवानंद, पूर्व मंत्री सुरेंद्र बरवाला मौजूद रहे।
तनख्वाह बढ़ाने के लिए ही आंदोलन करती हैं आशा वर्कर्स
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा आशा वर्कर्स भी बुलाई गई थीं। इस पर उन्होंने कहा कि ये सिर्फ तनख्वाह बढ़वाने के लिए आंदोलन करती हैं। वास्तव में मरीजों का सही इलाज कर जो दुआएं मिलती हैं, वह तनख्वाह है। उनके संबोधन के द्वारा आश वर्कर्स द्वारा ताली नहीं बजाने पर उन्होंने कहा कि जब इनकी तनख्वाह बढ़ाई जाती है, तभी तालियां बजाती हैं।
12 अस्पतालों में आयुष्मान भारत के तहत इलाज
जिला के चार नागरिक अस्पतालों जींद, नरवाना, सफीदों व उचाना के अलावा आठ निजी अस्पतालों को भी इस योजना के तहत पैनल पर लिया गया है। इसके तहत परिवार को पांच लाख रुपये का इलाज मुफ्त दिया जाएगा। बीरेंद्र सिंह ने लोगों से आह्वान किया के वे अपने हकों को पहचानेें और इस योजना का लाभ लें।
13 गांवों में बनेंगे वेलनेस सेंटर
बीरेंद्र सिंह ने कहा कि सिर्फ शहरों के अस्पतालों में ही नहीं, जिले के 13 गांवों में भी वेलनेस सेंटर बनाए जाएंगे। यहां मरीज छोटी-मोटी बीमारियों का इलाज करवा सकेंगे।
सरकार मेरी बात नहीं मान रही, अगल-अलग हो चिकित्सकों का शहरी व ग्रामीण कैडर
बीरेंद्र सिंह ने जींद में चिकित्सकों की कमी पर कहा कि सरकार उनकी बात नहीं मान रही है। पिछली सरकारों ने भी नहीं मानी। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों के ग्रामीण व शहरी कैडर अलग-अलग होने चाहिए, ताकि जींद जैसे स्थानों पर डॉक्टर रहें। उन्होंने कहा कि हर डॉक्टर शहर में अच्छी सुविधाएं देखता है। जींद में इस प्रकार की सुविधाएं नहीं होने के चलते डॉक्टर यहां टिक नहीं पाते। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों की कमी के लिए पिछली सरकारें जिम्मेदार हैं। चिकित्सकों की भर्ती तो कर ली जाती थी, लेकिन चिकित्सक ज्वाइनिंग नहीं करते थे। इससे कमी हुई है।
जब पत्रकारों ने कहा कि आप ही सरकार हैं तो उन्होंने जवाब दिया कि ‘मैं कहां सरकार हूं।’ मैं सरकार होता तो यह सवाल नहीं करना पड़ता। हमेशा अपनी बेबाकी के लिए चर्चित रहने वाले मंत्री साहब ने एक बार फिर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अलग-अलग कैडर बना दे तो इस समस्या का समाधान हो सके। वहीं जींद के मेडिकल कॉलेज पर बीरेंद्र सिंह ने कहा कि इसके लिए डीपीआर तैयार करने के लिए एजेंसी पर काम चल रहा है। सरकार इसको लेकर गंभीर है। मुख्यमंत्री मनोरह लाल और वे खुद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मिले थे। इसके लिए एनसीआर बोर्ड से बजट का प्रावधान करवाया गया है। डीपीआर तैयार होते ही दो साल में मेडिकल कॉलेज बन जाएगा।
रोहतक में लगें जींद मेडिकल कॉलेज की कक्षाएं
बीरेंद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को सुझाव दिया है कि जब तक जींद में मेडिकल कॉलेज नहीं बनता, यहां के मेडिकल कॉलेज की कक्षाओं का इंतजाम रोहतक में करवाया जाए। इससे जब तक मेडिकल कॉलेज शुरू होग, एक-दो बैच तैयार हो चुका होगा। इससे चिकित्सकों की कमी नहीं रहेगी।
मंत्री से मिलने के लिए भटकती रहीं महिला,
जिस समय केंद्रीय मंत्री अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना का शुभारंभ करने पहुंचे, यहां कैथल रोड निवासी गीता अपनी समस्या को लेकर पहुंची। गीता बीरेंद्र सिंह से मिलना चाहती थी, लेकिन यहां पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया। इसके बाद कार्यक्रम की समाप्ति के बाद भी महिला ने बीरेंद्र सिंह ने मिलना चाहा, पर मिलने नहीं दिया गया। रोते हुए महिला ने बताया कि उसका पति बीमार है और घर खस्ताहाल है। उसके पति की बचने की कोई संभावना नहीं है, उसे मदद चाहिए, लेकिन सरकारी अधिकारी व कर्मचारियों ने उसकी पीड़ा की अनदेखी कर दी। मंत्री के जाने के बाद कुछ अधिकारियों ने महिला से कहा कि मंत्री रेस्ट हाउस गए हैं, वहां जाकर उनसे मिला जा सकता है।