अमर उजाला ब्यूरो
जींद। लोगों को स्वच्छ पेयजल मुहैया करवाने में जन स्वास्थ्य विभाग जिले में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। गांवों की तो छोड़ें, जनस्वास्थ्य विभाग शहरों में व कस्बों में भी साफ पानी मुहैया नहीं करवा पा रहा है। हालांकि जन स्वास्थ्य विभाग विश्व स्वास्थ्य संगठन के नॉर्म के अनुसार पानी सप्लाई करने का दावा कर रहा है, लेकिन यह पानी लोगों के लिए जहर साबित हो रहा है। शहर में भी लोग एक हजार टीडीएस तक पानी पीने को मजबूर हैं। इसके अलावा शहर की पॉश कॉलोनियों में भी गंदा पानी सप्लाई हो रहा है। इससे लोग त्रस्त हैं।
जिले के लोगों को पानी सप्लाई करने के लिए जन स्वास्थ्य विभाग ने तीन डिविजन में बांटा है। जींद डिविजन नंबर एक में शहर के साथ 51 गांव हैं, डिविजन नंबर दो में जुलाना, सफीदों के साथ 144 गांव व नरवाना डिविजन में शहर के साथ 111 गांव आते हैं। जिले में कुल 306 गांव हैं। जन स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इनमें से 137 गांवों में नहरी पेयजल के स्त्रोत हैं और इनसे 172 गांवों में पेयजल सप्लाई किया जा रहा है। वहीं 117 गांवों में ट्यूबवेल लगाए गए हैं। इनसे 134 गांवों में पानी सप्लाई किया जा रहा है। कुल मिलाकर जन स्वास्थ्य विभाग कागजों में पूरे जिले में साफ पानी सप्लाई कर रहा है, लेकिन हकीकत इससे परे है। जमीनी हकीकत यह है कि जिले के 306 में 200 से अधिक गांवों में पेयजल संकट है। जिन गांवों में नहरी पेयजल सुविधा का दावा किया जा रहा है, वहां महीने में महज दस से 15 दिन ही नहरी पानी सप्लाई हो पा रहा है। इसका मुख्य कारण है नहरों से जलघरों में पानी नहीं पहुंचना।
लोगों ने खुद की है व्यवस्था
पेयजल की सबसे अधिक दिक्कत जुलाना क्षेत्र में है। यहां जुलाना कस्बे सहित अधिकतर गांवों में गंदा और खारा पानी सप्लाई हो रहा है। इसके चलते लोगों ने अपने स्तर पर व्यवस्था की है। इसके तहत गांवों में नहरों के पास ट्यूबवेल लगाकर लोगों ने सामुदायिक पेयजल सप्लाई शुरू की है। जुलाना ब्लॉक के अधिकतर गांवों में व्यवस्था इसी के सहारे चल रही है।
दो बार शत प्रतिशत सैंपल फेल
जींद शहर के कुछ क्षेत्र गंदे पानी की सप्लाई से त्रस्त हैं। इसमें सबसे अधिक हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, शिव कॉलोनी, स्कीम नंबर पांच छह, दुर्गा कॉलोनी व पटियाला चौक क्षेत्र में लगातार दूषित पानी सप्लाई हो रहा है। पिछले माह ही जन स्वास्थ्य विभाग ने हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी में दो बार पेयजल के सैंपल लिए हैं, लेकिन दोनों ही बार सभी सैंपल फेल आए हैं। अब जन स्वास्थ्य विभाग लोगों द्वारा सीवरेज की सफाई नहीं करने देने के कारण गंदे पानी की सप्लाई बता रहा है।
कागजों में सिमटी नहरी पानी आधारित पेयजल व्यवस्था
शहर को नहरी पेयजल मुहैया कराने के लिए पिछले करीब एक दशक से योजना बनाई जा रही है, लेकिन यह सिरे नहीं चढ़ पाई है। इस पर सरकार के प्रयासों से काम कुछ आगे बढ़ा है।
सिंघाना गांव आ चुका है डायरिया की चपेट में
करीब एक सप्ताह पहले ही सफीदों उपमंडल का सिंघाना गांव डायरिया की चपेट में आ चुका है। इसकी जांच करने पर स्वास्थ्य विभाग ने पेयजल में आ रही गंदगी को ही जिम्मेदार ठहराया था। अब गांव में टैंकर से पानी की सप्लाई की जा रही है।
जन स्वास्थ्य विभाग जिलेभर में पानी की सप्लाई कर रहा है। जहां नहरी पानी की सुविधा नहीं है, वहां ट्यूबवेल से पानी दिया जा रहा है। समय-सयम पर पानी के सैंपल लिए जाते हैं। इसमें दिक्कत पाए जाने पर या लोगों की शिकायत मिलने पर पानी की जांच कर गंदे पानी की समस्या दूर की जाती है। शहर में अधिक टीडीएस का पानी सप्लाई हो रहा है, लेकिन यह नियमानुसार सही है।
-उमेश सिंह, एसई, जनस्वास्थ्य विभाग।