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Jind News: सजा पूरी होने के बाद दो माह से जेल में बंद 10 बांग्लादेशी रिहा

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16जेएनडी37-जिला जेल में निरीक्षण करने पहुंचे मानवा​धिकार आयोग के अध्यक्ष ललित बत्रा। स्रोत प्रश
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जींद। जिला जेल से रविवार रात को 10 बांग्लादेशियों को रिहा कर दिया गया है। रिहा किए गए बांग्लादेशियों की सजा 24 दिसंबर को पूरी हो चुकी थी।
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सोमवार को मानव अधिकार आयोग की टीम आने की सूचना के बाद जेल प्रशासन जब रविवार को अपने सिस्टम को जांच रहा था तब जेल अधिकारियों को पता चला कि यहां पर 10 बांग्लादेशी सजा पूरी होने के बावजूद जेल में बंद हैं।
जैसे ही जेल अधिकारियों को इस बात की भनक लगी उन्होंने तुरंत इन्हें डिपोर्ट करने के लिए पुलिस अधिकारियों से संपर्क साधना शुरू कर दिया और रात में ही इन्हें जींद से कोलकाता के लिए रवाना कर दिया।
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जेल के अधिकारियों का मानना था कि यदि मानवाधिकार आयोग के सामने यह मामला आया तो उन्हें मानवाधिकार आयोग की खरी खोटी सुननी पड़ सकती है।
पुलिस ने करीब दो साल पहले दस बांग्लादेशियों को अवैध रूप से भारत में रहने के आरोप में गिरफ्तार किया था जिसमें तीन महिलाएं भी शामिल थीं। गिरफ्तार किए गए 10 लोगों में दो दंपती थे। इनमें मोहम्मद सुहाग व उनकी पत्नी शेफाली अख्तर, मोहम्मद आलमगीर व उनकी पत्नी शरमीन अख्तर, मोहम्मद यूसुफ, अब्दुल आफताब, मोहम्मद रूबल राणा, अरशद अली, मोहम्मद दुलाल हुसैन, सोनिया (लड़की) शामिल थी।
इन सभी लोगों को अदालत ने अवैध रूप से भारत में रहने के मामले में दो साल की कैद की सजा सुनाई थी। यह सजा दिसंबर में पूरी हो चुकी थी लेकिन इसके बावजूद यह सभी जींद जेल में बंद थे।
वर्जन
इसमें कुछ प्रीवेंटिव बात रही हो लेकिन आयोग इस मामले की जांच करेगा। यदि जांच में कहीं पर पुलिस अधिकारियों या जेल प्रशासन की कोई लापरवाही सामने आई तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -ललित बत्रा, अध्यक्ष, मानवाधिकार आयोग
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बांग्लादेश में चुनाव की वजह से हुई देरी
10 बांग्लादेशियों की सजा 24 दिसंबर को पूरी हो गई थी। उसके बाद आव्रजन नियमों के तहत प्रक्रिया शुरू की गई थी। ऐसे मामलों में इन लोगों के परिवार से संपर्क किया जाना होता है और पिछले दिनों बांग्लादेश में चुनाव होने के चलते इसमें काफी समय लग गया। इसीलिए इनको डिपोर्ट करने में समय लगा है। -सुरेंद्र, उपाधीक्षक, जिला जेल जींद
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