गत दिवस राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों सार्वजनिक जीवन की सशक्त महिला का अवॉर्ड प्राप्त करने वाली डॉ. संतोष दहिया का शनिवार को बहादुरगढ़ में अभिनंदन हुआ। दहिया ने कहा कि पुरातन भारत में महिलाओं को पुरुषों के समक्ष बराबर का दर्जा दिया गया। यहां तक कि कई स्थानों पर तो उन्हें पुरुषों से भी ऊपर स्थान दिया गया है। किंतु आज महिला-उत्पीड़न की कई घटनाएं मन को खिन्न करती हैं।
सभी समझें जिम्मेवारी
राष्ट्रीय सर्वखाप पंचायत की महिला विंग अध्यक्ष एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में प्रोफेसर डॉ. संतोष दहिया ने कहा कि केवल कानून बनाकर हम महिलाओं को सशक्त और समर्थ नहीं बना सकते, यह हर एक की सामाजिक जिम्मेदारी है। वह सामाजिक जिम्मेदारी हमारी बहन, बेटियों को शिक्षित करने से लेकर उन्हें सामाजिक सुरक्षा और पारिवारिक नैतिक बल प्रदान करने की है। उन्होंने कहा कि आज देश के समक्ष कई बड़ी समस्याएं और चुनौतियां हैं, उनमें सबसे प्रमुख चुनौती महिलाओं के प्रति बढ़ रहा अत्याचार और उनका शोषण है।
भ्रूण हत्या से लेकर घूंघट प्रथा के विरुद्ध आवाज उठाने वाली डॉ संतोष दहिया ने हरियाणा के परंपरावादी समाज में महिलाओं को नई सोच देने का प्रयास किया है। बचपन से ही महिलाओं की दशा सुधारने का संकल्प लिया और आज भी संघर्षरत हैं। लिंगभेद खत्म करने यानी महिला-पुरुष गैर-बराबरी समाप्त करने के मामले में भी वे पूरी तरह गंभीर नजर आती हैं।
कई लोगों ने किया स्वागत
डॉ. संतोष ने कहा कि शिक्षा के बढ़ते प्रसार से लगता है कि वह दिन दूर नहीं जब भारत की हर एक बहन-बेटी अपने हक के लिए प्रतिबद्ध होगी। उनका स्वागत करने वालों में कृष्ण रुहिल, कर्मबीर राठी, नरेंद्र देसवाल, राजेश खत्री, सत्येंद्र दहिया, प्रदीप लडरावन, भारत नागपाल, प्रदीप गुप्ता, रणबीर गुलिया, सतनारायण छिकारा, नरदेव दहिया सहित सैकड़ों लोग शामिल रहे। समारोह के समापन से पूर्व उन्होंने उपस्थित सभी लोगों को महिला रक्षा की शपथ दिलाई।