सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा दिए जाने के दावे झज्जर सिविल अस्पताल में हवा हो रहे हैं।
शुक्रवार को अंबोली निवासी एक महिला को उसके परिजन डिलीवरी के लिए सिविल अस्पताल लेकर आए। मगर जब महिला को डिलीवरी पेन शुरू हुआ तो अचानक लाइट चली गई।
कुछ ही देर में महिला का पेन काफी बढ़ गया मगर उसके बाद भी लाइट नहीं आई। इस पर महिला के परिजनों व चिकित्सकों ने अपने मोबाइलों की लाइट जलाकर डिलीवरी करानी शुरू कर दी। सूचना मिलने के बाद जब मीडियाकर्मी लेबर रूम में पहुंचे तो पांच मिनट के अंदर ही जेनरेटर चला दिया गया।
सिविल अस्पताल मे लोगों के जख्मों को मरहम लगाने की बजाय उनके दर्दों को कुरेदने का काम किया जा रहा है। गांव अंबोली निवासी महिला बबली गर्भवती है तथा उसकी डिलीवरी होनी थी।
परिजन रिस्क नहीं लेना चाहते थे, इसलिए उसे शुक्रवार को डिलीवरी के लिए सिविल अस्पताल ले आए। बबली को जब डिलीवरी पेन होना शुरू हुआ तो अचानक सिविल अस्पताल की लाइट गुल हो गई।
लाइट गुल हो जाने के बाद बबली व उनके परिजन परेशान हो गए। काफी देर तक इंतजार करने के बावजूद भी जब लाइट नहीं आई तो परिजनों व स्टाफ के सदस्यों के मोबाइल की लाइट जलाकर डिलीवरी का काम शुरू कर दिया।
स्टाफ रूम में लाइट, लेबर रूम में बत्ती गुल
हैरान कर देने वाली बात यह थी कि जब सिविल अस्पताल की लाइट गई तो लेबर रूम में पूरी तरह अंधेरा छा गया, मगर स्टाफ रूम की लाइट व पंखे इनवर्टर से चल रहे थे।
स्टाफ सदस्य आराम से पंखे की हवा का आनंद ले रही थी, वहीं बबली की जान पर बनी हुई थी। इसी दौरान मीडियाकर्मी वहां पहुंच गए तो तुरंत किसी कर्मचारी को वहां भेजकर जेनरेटर चलाया गया।
सीएमओ से की थी मुलाकात
बबली के जेठ रामशरण ने बताया कि एक घंटे पहले उन्होंने सीएमओ से मुलाकात की थी। उन्हें समस्या से अवगत कराया था, मगर कोई समाधान नहीं हुआ।
वहीं बबली की सास सुनीता ने बताया कि पिछले एक घंटे से लाइट नहीं है। बबली को डिलीवरी पेन हो रहा है तथा अंधेरे के कारण वह काफी घबराई हुई है।
महिला के परिजनों ने लाइट नहीं होने की शिकायत मुझे दी थी। शिकायत मिलते ही जेनरेटर चलाने के आदेश दिए गए थे। जेनरेटर चला दिया गया है तथा स्थिति सामान्य है।
हमारा प्रयास रहता है कि सिविल अस्पताल में आने वाले लोगों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। -डॉ. रमेश धनखड़, सीएमओ, सिविल अस्पताल