किसी हादसे या वारदात का शिकार व्यक्ति के जीवन की पहली उम्मीद एंबुलेंस पर टिकी होती है। नियमानुसार एंबुलेंस में आपात स्थिति में काम आने वाली कई प्रकार के दवाएं, इंजेक्शन व ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध होते हैं। रविवार को एंबुलेंस सेवा पर यहां चौंकाने वाला खुलासा हुआ।
असल में प्रसव पीड़ा से कराह रही महिला को अस्पताल लाने के लिए पहुंची एंबुलेस में जो जीवन रक्षक दवाएं व इंजेक्शन थे, वे अक्तूबर महीने में एक्सपायर हो चुके हैं। महिला ने अस्पताल लाते समय एंबुलेंस में ही बच्चे को जन्म दिया।
इस दौरान अगर इमरजेंसी में किसी दवा की जरूरत पड़ती तो तय था कि स्टाफ इन्हीं दवाओं का ही इस्तेमाल करता। मामला संज्ञान में आने पर एनआरएचएम के निदेशक ने जांच के निर्देश दिए हैं।
लेट पहुंची एंबुलेंस, बढ़ी प्रसव पीड़ा
मूलरूप से नरवाना, जींद निवासी विलास फिलहाल एमपी माजरा गांव के पास मजदूरी का काम करता है। उसकी पत्नी उषा भी उसके पास रहती है।
उषा पिछले 9 माह से गर्भवती थी। रविवार को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई । मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देकर एंबुलेंस भेजने को कहा गया। एंबुलेंस करीब एक घंटे देरी से पहुंची, तब तक महिला प्रसव पीड़ा से वहीं कराहती रही। एंबुलेंस गांव जहांगीरपुर सीएचसी से भेजी गई।
प्रसव पीड़ा से कराह रही महिला को एंबुलेंस से सिविल अस्पताल लाया ही जा रहा था कि उसने रास्ते में ही बच्चे को जन्म दे दिया। चौंकाने वाली बात यह रही कि इस स्थिति में महिला को संभालने के लिए कोई महिला स्टाफ या नर्स नहीं थी। एंबुलेंस चालक के साथ एक पुरुष कर्मी था।
बच्चे को जन्म दे रही महिला को उसके साथ आई एक अन्य महिला ने ही संभाला। गनीमत रही कि महिला को रास्ते में किसी इंजेक्शन या दवा की जरूरत नहीं पड़ी।
न दवा और न सिलेंडर था किसी काम
एंबुलेंस में बच्चा जनने के बाद जच्चा बच्चा तो सकुशल सिविल अस्पताल पहुंच गए, लेकिन मामले में स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही की पोल भी खुल गई।
एंबुलेंस में जो दवाएं व ऑक्सीजन सिलेंडर थे, वह किसी काम के नहीं थे। इसमें रखे इंजेक्शन का पूरा पैक अक्तूबर महीने में ही एक्सपायर हो चुका था।
अन्य दवाइयां भी एक्सपायरी डेट की मिली। बात ऑक्सीजन सिलेंडर की करें तो उसमें न तो ऑक्सीजन सप्लाई वाली नली थी और जो मास्क था, वह कचरे की तरह पड़ा था। किसी भी हादसे में घायल के लिए सबसे पहले जख्म साफ करने के लिए जरूरत कॉटन की होती है। एंबुलेंस में जो रूई थी, वह पानी से भीग कर खराब हो चुकी थी। साथ में धूल मिट्टी से सनी थी।
कराएंगे जांच, होगी कार्रवाई
एंबुलेंस में स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही की पोल तब खुली जबकि एनआरएचएम के निदेशक डॉ. पीके महापात्रा यहां सिविल अस्पताल में निरीक्षण पर थे।
उनको पूरे मामले की जानकारी मिली तो इसकी जांच कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश सिविल सर्जन को दिए। उन्होंने कहा कि एंबुलेंस में सुविधाओं पर जोर दिया जाएगा।