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धर्म, संस्कृति अपनाकर ही प्रतिस्पर्धा में टिकना संभव : सीपीएस

Mon, 21 Dec 2015 11:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/झज्जर
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 देर रात तक चली सांस्कृतिक संध्या के साथ ही तीन दिवसीय गीता जयंती महोत्सव का बाग जहांआरा स्टेडियम में समापन हुआ। समारोह में विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों, कलाकारों ने रागिनी, नाटक, भजन व श्लोक आदि से कार्यक्रम में सांस्कृतिक छंटा बिखेरी। मुख्यातिथि मुख्य संसदीय सचिव सरदार बख्शीश सिंह विक्र ने विजेताओं को सम्मानित किया। इससे पहले उन्होंने गीता पुरम में लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया और प्रशंसा की। सीपीएस ने कहा कि 13 माह में पहला मौका है जब वह झज्जर आए हैं और यह उनके लिए सौभाग्य की बात है कि गीता महोत्सव में यहां आना हुआ। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत गीता में श्रीकृष्ण मानव जाति के कल्याण का मार्ग दिखा कर गए हैं। भूमंडलीकरण के दौर में आज विकसित देशों के सामने प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए जरूरी है कि हम अपनी धर्म व संस्कृति को आदर दें। गीता का उपदेश राष्ट्र व समाज के उन्नति के लिए मार्ग दिखाता है और यह ऐतिहासिक है। गीता के संदेश को पूरे विश्व में फैलाने की आवश्यकता है ताकि अशांति व भ्रष्टाचार से विश्व को मुक्त किया जा सके।
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भारत माता की जय नारे का बखान
सीपीएस बख्शीश सिंह ने इस दौरान भारत माता की जय के नारे को देशवासियों के लिए गर्व की बात कहा। वे बोले कि भारत मां का नारा बुलंद करने के लिए वर्ष 1947 के बाद बहुत खून खराबा हुआ है। असंख्य जानें गई हैं। पूरे विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है जहां भारत मां की जय का नारा गूंजता है। वे बोले कि आजादी के बाद पाकिस्तान में सुना है कि वहां कभी पाक मां जिंदाबाद का नारा लगा हो। इससे पहले डीसी अनीता यादव ने उनका कार्यक्रम में आने पर स्वागत किया।
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