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Jhajjar-Bahadurgarh News: प्रवासी मजदूरों की कमी से गेहूं की कटाई प्रभावित

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फोटो नंबर 71: मजदूरों की कमी में गेहूं कटाई करता एक किसान परिवार। (संवाद)
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बादली। इस बार मजदूरों के अभाव में गेहूं की कटाई का काम धीमी गति से चल रहा है किसान मजूदर न मिलने से परेशान हैं। क्षेत्र में कटाई के सीजन में बिहार और यूपी से बड़ी संख्या में मजदूर आते थे लेकिन इस बार यह संख्या बहुत कम है। वहीं लोगों का कहना है कि इस बार कटाई का सीजन लंबा चल सकता है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि गैस की किल्लत के चलते इस बार मजदूर नहीं आ रहे हैं।
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बादली पैक्स के अधीन आने वाले 24 गांवों में करीब 3200 एकड़ जमीन पर गेहूं की बिजाई है। प्रति एकड़ गेहूं की कटाई के लिए छह से आठ हजार रुपए लिए जा रहे हैं जो कि किसानों के लिए घाटे का सौदा भी हैं।

35 एकड़ में फसल पककर तैयार नहीं मिल रहे मजदूर
किसान गौरव का कहना है कि 35 एकड़ जमीन में गेहूं की फसल कटाई का इंतजार कर रही है लेकिन मजदूर नहीं मिलने से उनकी चिंता बढ रही है। पिछले चार दिनों से हुई बूंदाबांदी से मशीन फेल हो गई है।
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मजदूर न मिलने से खुद कर रहे कटाई
गुभाना के किसान कुलदीप का कहना है कि 15 एकड़ गेहूं की कटाई के लिए मजदूर नहीं मिलने पर परिवार ने ही कटाई का कार्य संभाला है। पिछले चार दिनों से परिवार कटाई कार्य कर रहा है जबकि मजदूरों की तलाश भी की जा रही है।


घरेलू गैस किल्लत का असर
प्रवासी मजदूरों ने घरेलू गैस किल्लत को देखते हुए अभी प्रवेश नहीं किया है। बाहर से आए कुछ श्रमिकों में दीपचंद, कैलाश, अमीबाई और भानु ने बताया कि मजदूरों को डर है कि कहीं गैस किल्लत बढ़ गई तो उन्हें परेशानी होगी।

बिहार, यूपी और पश्चिम बंगाल से आते हैं मजदूर:
हरियाणा में मजदूरी का जिम्मा आमतौर पर बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के श्रमिकों के कंधों पर होता है। यहां के मजदूरों की तुलना में बाहरी मजदूर सस्ता भी होता है और काम भी अच्छा करता है। लेकिन इस बार पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने के चलते मजदूरों ने यहां के काम से दूरी बनाई है।
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