रोहतक। क्लेम फाॅर्म में सुंडाना की जगह ककराना लिखा जाने पर बीमा कंपनी ने किसान का सात साल क्लेम रोके रखा। अब जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिए हैं कि नाम गलत मिलने पर किसान या बैंक से आपत्ति मांगनी चाहिए थी। किसान को एक माह में बीमा कंपनी नौ प्रतिशत ब्याज सहित 15,295 रुपये और पांच हजार हर्जाना व पांच हजार रुपये कानूनी खर्च दे।
आयोग के रिकाॅर्ड के मुताबिक सुंडाना गांव निवासी प्रदीप ने 2023 में अर्जी दायर की थी कि उसने 1.21 हेक्टेयर में गेहूं की फसल की बिजाई की थी। सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के माध्यम से साल 2019-20 के लिए बीमा करवाया था। मार्च में गेहूं की फसल जलभराव (खेत में पानी भर जाने) के कारण नष्ट हो गई। उसने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत दावा किया।
सर्वे में फसल का 20 प्रतिशत नुकसान बताया गया जबकि 90 प्रतिशत फसल नष्ट हुई थी। रिपोर्ट में नुकसान का प्रतिशत वाला कॉलम भरा हुआ नहीं था। नुकसान का प्रतिशत शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर लेने के बाद भरा गया था। जब उसने बीमा कंपनी से क्लेम मांगा तो कहा गया कि गांव का नाम सुंडाना की जगह ककराना लिखा हुआ है। इसलिए क्लेम खारिज किया जाता है।
आयोग ने किसान की अर्जी पर बीमा कंपनी को नोटिस भेजा। बीमा कंपनी ने कहा कि शिकायत गलत है। आयोग ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद निर्णय दिया है कि किसान यह साबित करने में नाकाम रहा कि आसपास के किसानों को भी 90 प्रतिशत नुकसान हुआ था। दूसरा बैंक की तरफ से गांव का नाम सुंडाना की जगह ककराना लिखकर भेजा था। यह गलती से हुआ।
इसके लिए किसान जिम्मेदार नहीं है। हालांकि जमीन के रिकाॅर्ड में गांव का नाम सुंडाना ही है। ऐसे में बीमा कंपनी फसल में 20 प्रतिशत नुकसान मानकर 15,295 रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित दे। साथ में हर्जाना व कानूनी खर्च भी दिया जाए।