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सामान्य से सात डिग्री कम रहा तापमान, शीतलहर से ठिठुरे लोग

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पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी से मैदानी इलाके भी शीतलहर की चपेट में है। झज्जर जिले के लोग शीतलहर के कारण ठिठुर रहे हैं। करीब एक सप्ताह से मौसम खराब चल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को मौसम साफ रहने की संभावना है। जबकि बुधवार को मौसम में परिवर्तन होने की उम्मीद जताई जा रही है। सर्दी के कारण लोगों की परेशानी बढ़ गई है। लोग जरूरी काम से ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। सोमवार को तापमान सामान्य से सात डिग्री सेल्सियस कम रहा। अधिकतम तापमान सोमवार केे 17 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि न्यूनतम तापमान आठ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सर्दी की वजह से बाजारों में गर्म कपड़ों की खरीदारी बढ़ी है। बाजारों में ग्रामीण क्षेत्रों से खरीदारी करने वाले लोग भी समय से अपने घरों को पहुंच रहे हैं। जगह-जगह दुकानों व मकानों के सामने लोग टोलियों में अलाव सेंकते नजर आने लगे हैं।
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दमा के मरीज न निकलें बाहर
नागरिक अस्पताल में कार्यरत फिजिशियन विभाग के एमडी डॉ. संजीव हसीजा का कहना है कि फिलहाल ठंड के कारण दमा के मरीजों का सलाह दी जाती है कि वे सुबह-शाम जहां तक संभव हो सके बाहर न निकलें और ठंड से अपना बचवा अवश्य करें। बीमारी का दबाव बढ़ने पर चिकित्सक से इलाज करवाएं।
अभिभावक छोटे बच्चों का रखें ध्यान
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मुरारीलाल का कहना है कि अभिभावक बच्चों का ध्यान अवश्य रखें क्योंकि बच्चों में रोगरोधक क्षमता कम होती है। बच्चे जल्द ही ठंड की चपेट में आ जाते है, इसलिए बच्चों को पूरे शरीर को ढकने वाले गर्म कपड़े पहनाएं। ठंड लगने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। बच्चों को लेकर किसी प्रकार की लापरवाही न करें। थोड़ी सी भी लापरवाही बच्चों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है।
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ठंड से पड़ रहा है दुग्ध उत्पादन पर प्रभाव
ठंड बढ़ने के साथ दुधारू पशुओं के दुग्ध उत्पादन पर भी प्रभाव पड़ रहा है। जो भैंस सामान्य मौसम में दस लीटर दूध देती थी। उनके दूध में भी एक से डेढ़ लीटरकी कमी आ गई है। पशुपालकों को सलाह दी जाती है कि पशुओं को शाम के समय गुड़ खिलाएं और अगर ठंड की चपेट में आ जाता है, तो उसे तुरंत पशु चिकित्सक से दिखाकर उसका इलाज कराएं। एकदम से पशुओं को ठंडी हवाएं चलने पर अंदर से बाहर न निकालें।
फसलों के लिए मौसम अनुकूल
इस समय मौसम फसलों के लिए पूरी तरह से अनुकूल है। क्योंकि सरसों व गेहूं की फसल फुटाव पर है और उसे ठंड की आवश्यकता है। जिले में गेहूं की बिजाई का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है। जिले में 31 हजार हेक्टेयर भूमि में सरसों की फसल की बिजाई की गई हैं। जबकि करीब एक लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल भी बोई जा चुकी है। जिन किसानों ने गेहूं की फसल की बिजाई किए हुए 21 दिन का समय बीत चुका है, उन किसानों ने फसल की पहली सिंचाई कर दी है। फिलहाल जिन क्षेत्रों में बारिश नहीं हुई है, उन क्षेत्रों में किसान फसलों की सिंचाई करने में जुटे हुए हैं।
पशुपालकों को सलाह दी जाती है कि वो अपने पशुओं को ठंड से बचाए शाम के समय से ही पशुओं को अंदर बांध दें। जहां तक संभव हो सुबह भी धूप खिलने पर पशुओं को बाहर निकालें। अगर उससे पहले पशुओं को बाहर निकालते हैं तो उनके शरीर को कपड़े या पल्ली आदि से ढक दें।
डॉ. मनीष डबास, डीडीए, पशुपालन विभाग, झज्जर।
मौसम फसलों के लिए पूरी तरह से अनुकूल है। इस समय फसलों के लिए ठंड का होना आवश्यक है। किसानों को सलाह दी जाती है कि जिन क्षेत्रों में बारिश नहीं हुई। उनकी फसल की बिजाई हुए 21 दिन का समय बीत चुका है। वो किसान गेहूं की फसल की सिंचाई अवश्य कर दें।
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डॉ. जगजीत सांगवान, एसडीओ कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, झज्जर।
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