पक्षियों के प्राकृतिक आवास का शिलान्यास करते मंत्री कंवरपाल गुर्जर।
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प्रदेश के वन मंत्री कंवर पाल गुर्जर ने कहा कि पंचायती जमीन पर बाग लगाने के लिए पंचायतों को सहयोग देने और 3 साल तक देखरेख कर बाग को विकसित करने की परियोजना सरकार की है। पंचायती जमीन पर बागवानी की खेती से होने वाली फसल की बिक्री से जहां आर्थिक रूप से पंचायत को लाभ होगा वहीं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी पंचायतों का अहम योगदान रहेगा। वन मंत्री गुर्जर रविवार को झज्जर जिले के भिंडावास पक्षी विहार में वन्य एवं प्राणी विभाग द्वारा विश्व आर्द्र भूमि दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। विश्व आर्द्र भूमि दिवस पर भिंडावास पक्षी विहार में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें वन मंत्री ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करती मैराथन को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
राज्य में है कुल 1559 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र
वन मंत्री ने किसानों से रूबरू होते हुए कहा कि हरियाणा राज्य एक कृषि प्रधान राज्य है। राज्य में वन क्षेत्र कुल 1559 वर्ग किलोमीटर है जोकि राज्य के कुल क्षेत्रफल का लगभग 4 प्रतिशत के बराबर है। परंतु वन्य जीव संरक्षण के दृष्टि से कुल वन क्षेत्र का लगभग 20 प्रतिशत वन क्षेत्र राष्ट्रीय उद्यानों, वन्य जीव अभयारण्यों आदि के तहत संरक्षित किया हुआ है। राज्य में दो राष्ट्रीय उद्यान, 7 वन्य जीव अभयारण्य, 2 कन्जरवेशन रिजर्व एवं 5 कम्यूनिटी रिजर्व है। इसके अतिरिक्त राज्य में गिद्ध संरक्षण केंद्र, पिंजौर में स्थापित किया गया है जोकि एशिया में अपनी तरह का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है।
सर्वे में पाई गई पक्षियों की 309 प्रजातियां
विश्व आर्द्र भूमि दिवस के परिपेक्ष्य में राज्य भर में 30 बर्ड वॉचर की टीमें गठित करके बर्ड सर्वे कराया गया, जिसमें 130 बर्ड वॉचर ने हिस्सा लिया। सर्वे टीमों द्वारा कुल 309 प्रजातियों की गणना की गई। झज्जर जिले में वर्तमान में हुए पक्षी आंकलन सर्वेक्षण में 186 पक्षी की प्रजातियां पाई गई। उन्होंने बताया कि भिंडावास व खापड़वास वन्य प्राणी अभयारण्य झज्जर जिले में जुड़वा दलदलीय तश्तरी नुमा गड्ढे है, जो कि मानवोचित हस्तक्षेप के संशोधन से आर्द्र भूमि पारिस्थितिकी तंत्र में परिवर्तित हो चुके है तथा पक्षियों के लिए एक बेहतर आर्द्रिय आवास का विकल्प है। भिंडावास का क्षेत्र 1017 एकड़ है जो कि मई 1986 को वन्य प्राणी अभयारण्य अधिसूचित किया गया तथा खापड़वास को क्षेत्र 204 एकड़, 2 कनाल, 19 मरला जो कि 27.03.1991 में वन्य प्राणी अभयारण्य अधिसूचित किया गया। दोनों झीलों के मध्य 1.4 किमी की दूरी है। इन दोनों ही झीलों में एक ही प्रकार के आवासीय, शीतकालीन तथा प्रवासी पक्षी पाए जाते है।