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बॉर्डर खाली कराने की मांग को लेकर झाड़ोदा के ग्रामीणों ने निकाली तिरंगा यात्रा

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झाड़ौदा बॉर्डर को खोलने की मांग करते ग्रामीण। - फोटो : Bahadurgarh
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बहादुरगढ़। तीन कृषि सुधार कानून के खिलाफ चल रहे आंदोलन के कारण बंद पड़े बॉर्डर से झाड़ोदा के ग्रामीण काफी परेशान हो गए हैं। ग्रामीणों ने तीन दिन पहले झाड़ोदा में जाम लगाया था और वीरवार को तिरंगा यात्रा निकालकर रोष प्रदर्शन किया। यात्रा के दौरान भारी संख्या में ग्रामीण पैदल व ट्रैक्टरों पर सवार होकर झाड़ोदा से हरियाणा बॉर्डर तक आए। बॉर्डर से पहले ही ग्रामीणों को दिल्ली पुलिस ने टोल बैरियर पर रोक लिया। यहां पर नारेबाजी करते हुए ग्रामीण वापस चले गए।
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झाड़ोदा के ग्रामीणों पप्पू, सतबीर, सुमेर सिंह और लक्ष्मण का कहना है कि वह किसी तरह का टकराव नहीं चाहते। शांतिपूर्ण तरीके से अपनी यात्रा निकाल रहे हैं। वे सिर्फ बॉर्डर बंद के खिलाफ अपना रोष प्रकट करना चाहते हैं और इस बॉर्डर को खुलवाना चाहते हैं। बॉर्डर बंद होने से उन्हें लाखों का नुकसान हो रहा है। इसलिए वे बॉर्डर खुलवाने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बॉर्डर बंद होने से उनकी फसल खराब हो गई है। इस दौरान ग्रामीणों ने नारेबाजी की और किसान नेता राकेश टिकैत के खिलाफ जमकर अपना गुस्सा जाहिर किया। ग्रामीणों ने कहा कि बॉर्डर पर बैठे कुछ लोग सिर्फ अपनी राजनीति चमकाने के लिए किसान बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि अब असली किसान जाग गया है और अब वे अपना ज्यादा नुकसान सहन नहीं करेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि अगर बॉर्डर जल्द खाली नहीं किए तो वे इससे भी बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे और आरपार की लड़ाई लड़ेंगे।
किसान बोले- बॉर्डर जाम होने से हमारी फसलें हो रही बर्बाद
झाड़ोदा के किसान ओमप्रकाश, संजय, सुरेंद्र ने बताया कि झाड़ोदा में करीब 16 हजार एकड़ जमीन है। यहां सब्जियों की फसल बर्बाद हो रही है। यहां पर गोभी की फसल मुख्य होती है। जो गोभी 10 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकती थी आज वह 50 पैसे प्रति किलो के हिसाब से भी नहीं है। गांव का बॉर्डर बंद होने से हरियाणा दिल्ली आने जाने के लिए कैर गांव के खेतों के रास्ते से आ जा रहे हैं। उड़ती धूल फसलों पर जमा हो रही है, जिससे फसलें खराब हो रही है। इससे लगातार नुकसान बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि 49 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन ठेके पर ली है। गोभी की फसल खराब होने की वजह से उन्हें बंटाई कर पैसे भी नहीं मिल पा रहे हैं। इसी वजह से उनमें आक्रोश है। इसलिए किसान बॉर्डर जल्द से जल्द खुलवाने की मांग कर रहे है।
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