मौन धारण कर किसानों को श्रद्धांजलि देते आंदोलन कर रहे किसान। संवाद
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कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ चल रहे आंदोलन में शामिल दो और किसानों की वीरवार को मौत हो गई। दोनों किसान युवा थे। एक किसान पंजाब का तो दूसरा हरियाणा का रहने वाला है। इनमें से एक की मौत किसी बीमारी के चलते हुई है तो दूसरे की मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। एक किसान के शव को पीजीआई रोहतक में रखा गया तो दूसरे का बहादुरगढ़ के नागरिक अस्पताल के शव गृह में। पोस्टमार्टम के बाद ही दोनों की मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा। दूसरी तरफ धरना दे रहे किसानों ने साथियों की मौत पर मौन धारण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। यहां पर अब तक 8 किसानों की मौत हो चुकी है। मरने वाले किसानों की पहचान 37 वर्षीय जय सिंह पुत्र कुलदीप निवासी गांव टुंगवाली जिला बठिंडा और 38 वर्षीय देवेंदर सिंह निवासी जींद के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि देवेंदर सिंह टीकरी बॉर्डर पर 11 दिसंबर तक 7 दिनों तक किसानों के साथ रहा था। अचानक तबीयत बिगड़ने पर घर चला गया था। 13 दिसंबर को परिजनों द्वारा देवेंदर सिंह को पीजीआईए रोहतक में भर्ती करवाया गया था, जहां वीरवार को उसकी मौत हो गई, जबकि जयसिंह 15 दिसंबर को अपने भाई सुखविंद्र व अन्य कुछ किसानों के साथ टीकरी बार्डर पर जत्थे में शामिल होने के लिए आया हुआ था। वह बहादुरगढ़ बाईपास पर नजफगढ़ रोड फ्लाईओवर के नजदीक किसानों के साथ ठहरा हुआ था। रात को वह अपने साथी किसानों के साथ खाना खाकर सो गया, लेकिन सुबह करीब 5 बजे मृत मिला। सेक्टर-9 चौकी पुलिस को सूचना मिली तो चौकी इंचार्ज विनोद कुमार और उनकी टीम भी मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिया है। उन्होंने बताया कि अभी मृतक के बारे में परिजनों ने बयान नहीं दर्ज करवाए हैं। उसकी मौत हृदयघात से हुई है या अन्य कारणों से अभी पता नहीं चल पाया है। मृतक किसान तीन बच्चों का पिता था।
मृतक जयसिंह के साथ आए किसानों ने कहा कि किसान की मौत की जानकारी आंदोलन चला रहे कमेटी के सदस्यों को दे दी गई है। कमेटी क्या निर्णय लेती है उसके बाद ही शव का पोस्टमार्टम करवाने की बात कही जा रही है। बहादुरगढ़ के नागरिक अस्पताल में दो किसानों के शव रखे हुए हैं। इनमें एक मेवा सिंह का है तो दूसरा जय सिंह का।