झज्जर/बहादुरगढ़। स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का कैडर बनाने, सर्विस पीजी पॉलिसी में बांड की रकम एक करोड़ रुपये घटाने, डायरेक्ट एसएमओ की भर्ती बंद करने और फोर्थ एसीपी की सिफारिशें लागू करने आदि मांगों को लेकर सरकारी चिकित्सक दो घंटे हड़ताल पर रहे। उन्होंने ओपीडी में काम नहीं किया। चिकित्सकों की दो घंटे की हड़ताल से हजारों मरीज हलकान रहे। कुछ तो वापस ही लौट गए।
शनिवार को सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों ने हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन के नेतृत्व में सुबह 9 से 11 बजे तक दो घंटे की पेन डाउन हड़ताल रखी। सुबह मरीज 9 बजे सरकारी अस्पताल पहुंच गए थे और पर्ची भी कटवा ली थी। जैसे ही मरीज ओपीडी की तरफ गए तो उनको रोक दिया गया। हड़ताल के चलते डॉक्टर अपनी सीटों पर नहीं थे, जो सीट पर थे, उन्होंने भी दो घंटे तक किसी मरीज का उपचार नहीं किया। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग मरीजों को उठानी पड़ी। कई मरीज लौट गए। दोपहर 11 बजे के बाद डॉक्टरों ने ओपीडी शुरू की और मरीजों को देखा। सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन के जिला महासचिव डॉ. संदीप दलाल ने बताया कि उनकी प्रमुख मांग सरकारी क्षेत्र में रिक्त पदों को भरने और अधिक विशेषज्ञों को आकर्षित करने के लिए विशेषज्ञ कैडर का क्रियान्वयन किया जाए। केंद्र सरकार के समान वेतन और एसीपी ढांचा जहां चिकित्सा अधिकारी को 4, 9, 13 और 20 साल की आयु में एसीपी मिलता है। एसएमओ की सीधी भर्ती पर रोक और एचसीएमएस कैडर के सेवा नियम में संशोधन किया जाए। यथाशीघ्र पदोन्नति के माध्यम से सभी रिक्त एसएमओ पदों को भरा जाए, इन-सर्विस डॉक्टरों के लिए पीजी ब्रांड को एक करोड़ से घटाकर 50 लाख करने की मांग की।