कौशिक-फोटो 52 : तुलसी का पूजन करती महिला व अन्य। विज्ञप्ति
बहादुरगढ़। भारतीय संस्कृति केवल परंपराओं का संकलन नहीं बल्कि जीवन को अर्थ देने वाली चेतना है। इसी चेतना का प्रतीक है तुलसी पूजन। 25 दिसंबर तुलसी पूजन दिवस के रूप में मनाया गया। शिक्षाविद् सुमन कौशिक ने कहा कि तुलसी एक ऐसा पौधा है जो आंगनों में ही नहीं बल्कि हमारी आस्था, नैतिकता और जीवन-दर्शन में गहराई से रचा-बसा है। उन्होंने कहा कि तुलसी को भारतीय परंपरा में केवल एक औषधीय पौधा नहीं माना गया बल्कि उसे मां का स्थान दिया गया है। शास्त्रों में तुलसी को लक्ष्मी स्वरूपा कहा गया है, वहीं वैष्णव परंपरा में यह भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। तुलसी पूजन पूज्य और संरक्षक है। संवाद