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ट्रक ऑपरेटर हड़ताल पर

Tue, 09 Jun 2015 01:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ झज्जर
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ट्रांस्पोर्टरों और उद्यमियों के बीच चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। उद्यमियों के साथ मतभेद को लेकर सोमवार ट्रांस्पोर्टरों ने हड़ताल रखी। इस बाबत करीब दस हजार गाड़ियां यूनियनों में खड़ी रहीं।
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सैकड़ों ट्रांस्पोर्टर सड़क पर उतर आए और नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। इस प्रदर्शन में पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह जून और जिला परिषद के उपाध्यक्ष राजेश जून भी शामिल हुए।

प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम से मिलकर समस्या के शीघ्र समाधान की मांग की। इसके साथ ही ट्रांस्पोर्टर यूनियन ने चेतावनी भी दी है कि यदि जल्द ही बाहरी वाहनों पर रोक नहीं लगी तो वे सड़कों पर ट्रकों के साथ उतरेंगे।
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गौरतलब है कि उद्यमियों द्वारा बाहरी वाहनों का इस्तेमाल किए जाने पर ट्रांस्पोर्टरों के के साथ लंबे समय से विवाद चल रहा है। गत 5 जून को झज्जर में डीसी के साथ हुई मीटिंग के बाद तो हालात और बिगड़ गए हैं।

पिछले दो दिनों में ट्रांस्पोर्टर दो बार पंचायत कर चुके हैं। सोमवार को ट्रांस्पोर्टरों ने हड़ताल कर दी। शहर की तमाम 14 यूनियनों में शाम तक वर्क सस्पेंड रहा। करीब 9745 वाहन यूनियनों या अन्य स्थानों पर खड़े रहे।

हड़ताली ट्रांस्पोर्टर परनाला रोड स्थित दि पब्लिक कैरियर यूनियन में पहुंचे। यहां ट्रांस्पोर्टराें की पंचायत हुई। पंचायत में वे प्रशासन व उद्यमियों के खिलाफ जमकर गरजे।

मामला काफी गर्म हो गया। तब पूर्व प्रधान चौ. बलमत सिंह ने गुस्साए ट्रांस्पोर्टरों को शांत करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यहां वर्षों से ट्रांस्पोर्ट यूनियनें हैं, आगे भी रहेंगी। ये केवल यूनियन नहीं, हमारी एकता है। इस एकता को बनाए रखना है तो शांति से काम लेना होगा।
-नेता भी आए समर्थन में
पंचायत में पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह जून भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरकार से टक्कर लेने से कुछ फायदा नहीं होगा। प्रदर्शन व जाम करने के बजाय शांतिपूवर्क समाधान निकालने की कोशिश करें।

इसपर राजेश ने कहा कि इतने दिनों से शांतिपूर्वक ही तो काम कर रहे हैं, शांति के बदले क्या मिला? अब तो प्रशासन भी यूनियनों को नकार रहा है। पेट की लड़ाई है अब वक्त सख्त कदम उठाने का है।

10 जून तक समय
ट्रांस्पोर्टर मनोज मान ने कहा कि पिछले कई दशकों से शहर में ट्रांस्पोर्ट यूनियनें हैं। मगर कुछ उद्यमियों के कारण यूनियनों को नकारा जा रहा है। मगर कुछ उद्यमी टैक्स बचाने के चक्कर में बाहरी वाहनों का सहारा ले रहे हैं। यह कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दि हनुमान टैंपो यूनियन के प्रधान महेश कौशिक ने कहा कि यूनियनों के सहारे कई हजार परिवारों का गुजारा चल रहा है।

अभी तो कुछ उद्यमी गलत कर रहे हैं, कल को सभी करने लगेंगे। ऐसे में ट्रांस्पोर्टरों का तो काम ही ठप हो जाएगा, कैसे अपने परिवारों को चलाएंगे। प्रधान रामकुंवर ने कहा कि प्रशासन के पास दो दिन का समय है। यदि 10 जून की शाम तक बाहरी वाहनों पर रोक नहीं लगी, तो बड़े स्तर पर प्रदर्शन होगा। 

एसडीएम को ज्ञापन
पंचायत के बाद सभी यूनियनों के पदाधिकारियों की बैठक हुई। बाद में हाथ में बैनर लेकर सैकड़ों ट्रांस्पोर्टर सड़क पर उतर गए। ट्रांस्पोर्टर एकता जिंदाबाद के  नारे लगाते हुए लघु सचिवालय की ओर चल दिए। पूर्व विधायक राजेंद्र जून और पूर्व प्रत्याशी राजेश जून भी शामिल थे। लघु सचिवालय में भी जमकर नारेबाजी की।

एसडीएम अमरदीप जैन और डीएसपी कप्तान सिंह को ज्ञापन सौंपा। ट्रांस्पोर्टरों ने एसडीएम से कहा कि वे भी व्यवस्था बनाए रखना चाहते हैं। मगर आज उनका रोजगार प्रभावित हो रहा है, पेट के खातिर उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा। वे सभी शर्तें मानने को तैयार हैं, बस बाहरी वाहनाें का हस्तक्षेप बंद करा दिया जाए।

इस पर एसडीएम अमरदीप जैन ने कहा कि वह ट्रांस्पोर्टर-उद्यमी किसी के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। आगामी दो-चार दिनों में समस्या का हल निकाला जाएगा। एसडीएम के आश्वासन के बाद शाम को हड़ताल खुल गई।

ये है मामला
ट्र्रांस्पोर्टरों का आरोप है कि टैक्स चोरी बचाने के लिए उद्यमी यूनियनों के बजाय बाहरी वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। जिससे उनका रोजगार ठप हो जाता है। उद्यमियों का कहना है कि यूनियनों के माध्यम से ट्रक ऑपरेटर उनसे बहुत ज्यादा किराया वसूलते हैं और खराब व्यवहार करते हैं।

कई बार तो यह किराया चार गुणा ज्यादा हो जाता है। इसलिए उन्हें दिल्ली से ट्रक किराए पर लेने पड़ते हैं। यानी, ट्र्रांस्पोर्टर माल ढोने के लिए बहादुरगढ़ में बाहरी ट्रकों को बुलाना बंद करने की मांग कर रहे हैं।
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