झज्जर। कोराना काल के बाद लोगों का होम्योपैथी उपचार के प्रति भरोसा बढ़ा है। होम्योपैथी विभाग के अधिकारी और चिकित्सक इसका दावा कर रहे हैं। उनका दावा है कि सामान्य अस्पताल में होम्योपैथी की ओपीडी कोरोना काल के बाद से ही काफी इजाफा हो रहा है। कोराना के बाद लोगों का रुझान 80 प्रतिशत तक बढ़ा है। प्रतिदिन लगभग 150 से ज्यादा मरीज होम्योपैथी की दवा लेने के लिए पहुंच रहें हैं।
एलोपैथी, आयुर्वेद के साथ लोग इस पैथी से भी इलाजकरवाने लगे हैं। होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ निकुंज शर्मा ने बताया कि कारेाना के बाद होम्योपैथी के प्रति लोगों का रुझान करीब 80 प्रतिशत तक बढ़ गया है। क्योंकि कोरोना में होम्योपैथिक दवाओं ने महामारी के फैलाव को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने बताया कि कैंसर व एलर्जी जैसी गंभीर बीमारियों के मरीज भी होम्योपैथी इलाज अपना रहे हैं। इसकी दवा का कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है। उन्हाेंने बताया कि करीब 80-90 प्रतिशत मामलों में लोग होम्योपैथी के पास तब पहुंचते हैं, जब अन्य चिकित्सा पद्धतियों से इलाज कराकर थक चुके होते हैं। कई बार तो 15 से 20 साल से इलाज कराने के बाद रोगी होम्योपैथी के पास पहुंचते हैं। खान-पान और रहन-सहन पर ध्यान दें तो लोग खुद ही अनुभव करेंगे कि होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति मानव मात्र के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
लोगों में भांति है कि होम्योपैथी के इलाज में लंबा समय लगता है जबकि ऐसा नहीं है। लोगों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ने लगी है। बड़ी-बड़ी गंभीर बीमारियों का इलाज अब इस पद्धति से होने लगा है। इसके अलावा बाल झड़ना, चर्म रोग से संबंधित समस्याओं का इलाज भी बड़ी संख्या में लोग होम्योपैथी से लोग करवाने लगे हैं। इस पद्धति से बीमारी की जड़ तक इलाज होता है और बीमारी ठीक हो जाती है। होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. निकुंज शर्मा ने बताया कि इस चिकित्सा पद्धति में विश्वास करने वाले मरीजों की संख्या दो गुना तक बढ़ी है। सर्दी शुरू हो रही है बदलते मौसम में कई तरह के रोग उत्पन्न हो रहे हैं। इसमें इनफ्लुएंजा, डेंगू, मलेरिया एवं टाइफायड जैसे रोग कोविड का आभास देकर लोगों को परेशानी में डाल रहा है। ऐसे में हमें रोगों की अच्छे से पहचान करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि लोग आम बीमारियों के लिए घर में कुछ होम्योपैथी दवा रख सकते हैं।