मंगलवार को गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड को सुचारु रूप से निकालने के लिए सोमवार को संयुक्त मोर्चा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने तैयारियों को अंतिम रूप दिया, लेकिन टीकरी बॉर्डर से दिल्ली में ट्रैक्टर मार्च का प्रवेश शुरू होने के समय की जानकारी स्पष्ट नहीं हो पाई। इस ट्रैक्टर मार्च को परेड की तरह अनुशासित ढंग से निकालने के लिए युवा स्वयंसेवकों को ट्रेनिंग दी गई और सभी को जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
बहादुरगढ़ शहर में सोमवार को दिनभर सड़कें जाम रहीं। चारों ओर ट्रैक्टर ही ट्रैक्टर नजर आ रहे। इतने बड़े ट्रैक्टर मार्च को संभालने की चुनौती को भी किसान संगठनों के नेता गंभीरता के साथ लेकिन भरोसे का साथ ले रहे हैं। सभी किसानों को साफ हिदायत दी जा रही है कि पुलिस कर्मी या किसी अन्य नागरिक के साथ किसी भी हालत में नहीं उलझना है। ट्रैक्टर मार्च को सुचारु रूप से संपन्न करवाने के लिए प्रशिक्षित किए गए स्वयंसेवक ट्रैक्टरों पर चलने वाले किसानों से संयुक्त मोर्चा द्वारा जारी की गाइड लाइंस का पालन करवाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर मोर्चा के नेताओं को मिलकर या मोबाइल फोन से आवश्यक जानकारी देंगे। ट्रैक्टर मार्च के रास्ते में किसानों को होने वाली किसी भी तरह की परेशानी का समाधान करेंगे। सुरक्षा, रास्ता दिखाने, पीने के लिए पानी, आपात स्थिति में दवाओं, अल्पाहार, भोजन और ट्रैक्टर खराब होने पर मरम्मत तक का इंतजाम वॉलंटियर संभालेंगे।
स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण में खलल न आने देने के लिए मंगलवार को सुबह साढ़े दस बजे ही टीकरी बॉर्डर सभा स्थल के आसपास संगीत बजाने वाले लाउडस्पीकरों की आवाज कम कर दी गई। तय कार्यक्रम के अनुसार मार्च में शामिल होने वाले किसान अपने-अपने ट्रैक्टर पर एक बहुत बड़ा तिरंगा झंडा लगाएंगे। दो महीने से चल रहे इस आंदोलन में शामिल किसान दिनभर गतिविधियों में शामिल रहने के बाद दिन में भी अपनी ट्रॉलियों में आराम कर लेते थे, लेकिन 26 जनवरी की परेड की तैयारियों और उत्साह की वजह से 25 जनवरी को दिन में किसानों ने आराम नहीं किया।
भारतीय किसान यूनियन पंजाब के अध्यक्ष परगट सिंह ने बताया कि रात को भी किसानों को नहीं सोने के लिए कहा गया है। सभी ट्रैक्टरों को एक लाइन में चलने की हिदायत दी गई है। किसानों के टीकरी बॉर्डर पड़ाव में रोहतक-दिल्ली रोड से हटकर दूसरे स्थानों पर भी हजारों ट्रैक्टर खड़े हैं, इसलिए मार्च की ट्रैक्टरों को धीमी गति में चलाया जाएगा, ताकि सभी ट्रैक्टर एक दूसरे से ज्यादा दूर न होने पाएं। मार्च में 40 से अधिक एंबुलेंस साथ चलेंगी। प्रत्येक 100 ट्रैक्टरों के पीछे एक एंबुलेंस रहेगी। प्रत्येक ट्रैक्टर पर चालक समेत पांच आदमी चलेंगे। इससे अधिक होंगे तो स्वयंसेवक उतार देंगे।
टीकरी बॉर्डर से ट्रैक्टर मार्च शुरू होने के समय को लेकर सोमवार को दिनभर असमंजस की स्थिति बनी रही।
ट्रैक्टर मार्च शुरू होने के समय को लेकर स्थिति सोमवार को स्पष्ट नहीं हो पाई। कुछ किसान नेताओं ने कहा कि राजपथ पर होने वाली परेड के बाद ही ट्रैक्टर मार्च शुरू होगा। भाकियू पंजाब के प्रधान परगट सिंह ने कहा कि हमने 26 जनवरी की सुबह में दिल्ली जाने का समय तय कर लेना है। हमारा मार्च दिल्ली में 70 किलोमीटर तक रहेगा। उसके बाद सभी किसान वापस अपनी जगह आ जाएंगे। हमें यह ट्रैक्टर मार्च शांतिपूर्वक करना है।