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थायरायड, सीटी स्कैन और एमआरआई की सुविधा नहीं

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: धूप में खड़े होना पड़ता है ओपीडी कार्ड बनवाने के लिए। - फोटो : Bahadurgarh
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बहादुरगढ़। लगभग अढ़ाई लाख आबादी वाले शहर बहादुरगढ़ के जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए सरकार द्वारा बनाया गया नागरिक अस्पताल बदइंतजामी का शिकार है। यहां अनेक प्रकार की जरूरी दवाएं नहीं मिलती, कई प्रकार के जरूरी टेस्ट नहीं होते। कई दूसरी मूलभूत आवश्यकताओं के अभाव में मरीज परेशान रहते हैं।
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कोरोना के दौर से पहले नागरिक अस्पताल की ओपीडी में हर रोज 1700 से 1800 तक मरीज आते थे। फिलहाल ओपीडी 1400-1500 मरीजों की चल रही है। ओपीडी के लिए पंजीकरण करवाने में भी मरीजों को कष्ट उठाना पड़ता है। पंजीकरण काउंटर पर मरीजों को धूप में खड़े होना पड़ता है। बुधवार को पर्ची बनवाने के लिए लाइन में लगे योगेश सैनी ने कहा कि यहां इतनी कड़ी धूप में कुछ देर खड़ा रहने से स्वस्थ आदमी भी बीमार हो सकता है, तो सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि बीमार की हालत क्या होगी।
लैब में कई प्रकार के टेस्ट का इंतजाम नहीं है। स्टाफ भी कम है। यहां कुल 14 पद स्वीकृत हैं और इनमें से 9 खाली हैं। लगभग सवा सौ सैंपल जांच के लिए आते हैं। जिनकी जांच करना थोड़े से स्टाफ के लिए संभव नहीं हो पाता। ऐसे में कुछ काम सीखने के इच्छुक विद्यार्थियों की मदद लेनी पड़ती है। सीटी स्कैन और एमआरआई तक की सुविधा यहां नहीं है। जबकि अनेक केसों में ऐसे टेस्ट की जरूरत पड़ती है। उन मरीजों को पीजीआई रोहतक रेफर किया जाता है। जहां पर उनकी हफ्तों में बारी आती है। प्राइवेट सेंटर में जाएं तो आर्थिक रूप से काफी परेशान करने वाला होता है।
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थायरायड के टेस्ट की व्यवस्था अस्पताल में नहीं है। डाक्टर लगभग हरेक गर्भवती महिला को यह टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। जौहरी नगर की गर्भवती महिला नियमित जांच के लिए अस्पताल आई थी। डाक्टर ने कई प्रकार के दूसरे टेस्ट लिख दिए। लेकिन थायरायड समेत कई टेस्ट अस्पताल में नहीं हो पाए। उन्हें अस्पताल के बाहर एक प्राइवेट लैब में टेस्ट करवाने पड़े। करीब 2400 रुपये खर्च हो गए। नजफगढ़ रोड के शास्त्रीनगर की निवासी पूनम ने बताया कि वह पांच महीने की गर्भवती है। डाक्टर ने थायरायड का टेस्ट करवाने की सलाह दी। लेकिन सरकारी अस्पताल में कहा गया कि यहां इस टेस्ट की सुविधा यहां पर नहीं है। इसलिए बाजार में ही किसी प्राइवेट लैब में टेस्ट करवाना पड़ेगा।
नागरिक अस्पताल में दवाएं न मिलने के कारण मरीजों को जरूरी दवाएं अस्पताल के आसपास खुली दुकानों से खरीदनी पड़ती हैं। महिला ओपीडी से दवा लेने के लिए निकली माया देवी ने बताया कि वह मजदूरी करती हैं। जब भी अस्पताल आती है तो डॉक्टर बाहर की दवा लिख देते हैं। दुकान से खरीदने के लिए कई बार जेब में पैसे नहीं होते। इसी तरह की शिकायत लाइनपार से आए राजेश और महावीर पार्क की अंजना ने की। राजेश ने बताया कि उसका पेट काफी दिन से खराब रहता है। अस्पताल आए तो डॉक्टर ने चार दवाएं लिखीं। इनमें से अस्पताल में केवल एक मिली। बाकी तीनों दवाएं बाहर से लेनी पड़ेंगी।
..........वर्जन
थायरायड के टेस्ट की सुविधा अस्पताल में फिलहाल उपलब्ध नहीं है। इस संबंध में विभाग के अधिकारियों को लिखा जाएगा। विभाग की ओर से जो दवाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं वे सभी मरीजों को दी जा रही हैं। कोशिश रहती है कि मरीज को बाहर से दवा न खरीदनी पड़े। नया भवन बन रहा है, जल्द ही अस्पताल 200 बेड का हो जाएगा। तब जांच आदि की हर तरह की सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी।
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-डा. देवेंद्र मेघा, प्रशासनिक अधिकारी
नागरिक अस्पताल बहादुरगढ़
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