साल्हावास। खानपुर कलां स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के तीसरे दिन रविवार को कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भागवत कथा का श्रवण किया।
कथावाचक पंडित गंगाराम शर्मा बृजवासी ने तीसरे दिन ध्रुव एवं प्रहलाद चरित्र, भरत चरित्र, नरसिंह भगवान की कथा, समुद्र मंथन की कथा, वामन भगवान की कथा एवं रामजी का जन्म उत्सव कल की कथा सुनाई। कथा का वाचन पंडित गंगाराम शर्मा बृजवासी के मुखारविंद से किया जा रहा है।
उन्होंने भगवान विष्णु के वामन देव अवतार की कथा का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि वामन अवतार के माध्यम से भगवान ने अहंकार पर धर्म और भक्ति की विजय का संदेश दिया। महाराज ने कहा कि राजा बलि अत्यंत दानी और पराक्रमी थे।
जब उनमें अहंकार उत्पन्न हुआ, तब भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर उनसे तीन पग भूमि का वरदान मांगा। कथावाचक ने बताया कि पहले पग में भगवान वामन ने संपूर्ण पृथ्वी, दूसरे पग में आकाश और स्वर्ग लोक को नाप लिया।
तीसरे पग के लिए जब कोई स्थान नहीं बचा, तब राजा बलि ने अपना शीश भगवान के चरणों में समर्पित कर दिया। इस प्रसंग के माध्यम से पंडित गंगाराम शर्मा ने श्रद्धालुओं को त्याग, समर्पण और विनम्रता का महत्व समझाया।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण भाव रखता है, वही सच्चे अर्थों में भक्त कहलाता है। कथा के दौरान भजन-कीर्तन से पूरा पंडाल भक्तिरस में सराबोर हो गया और श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए।
कथा के समापन पर आरती का आयोजन किया गया जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस दौरान तपस्वी हरसुखदास महाराज उपाध्यक्ष सनातन धर्म प्रचारक, अश्विनी शर्मा, पवन कौशिक, सोनू शर्मा, अत्तर सिंह, पवन दहिया मौजूद रहे।