झज्जर। शहर की अनाज मंडी में अब तक करीब 3 हजार क्विंटल बाजरा लेकर किसान पहुंच चुके हैं, लेकिन सरकारी खरीद नहीं होने से किसान परेशान हैं। शुक्रवार को भी पोर्टल खुला और न खरीद शुरू हुई। प्राइवेट खरीद का 700 रुपये प्रति क्विंटल कम होने की वजह से किसानों ने बाजारा नहीं बेचा।
शुक्रवार सुबह से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि आज सरकारी खरीद होने की पूरी संभावना है और पोर्टल भी खुल जाएंगे, लेकिन काफी देर इंतजार करने के बाद किसान अपना बाजरा लेकर पहुंचे। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि कोई भी पत्र सरकार की ओर से नहीं आया है। आढ़तियों, किसानों ने मांग करते हुए कहा है कि बाजरे की खरीद 20 सितंबर से शुरू हो जानी चाहिए थी, क्योंकि 20 सितंबर से बाजरा मंडियों में आना शुरू हो गया था। शुक्रवार को करीब 3 हजार क्विंटल बाजरा 100 किसानों की ओर से मंडी परिसर में लाकर उतरवा दिया गया है।
आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान हरेंद्र सिलाना ने बताया कि मौजूदा सरकार किसानों को परेशान करने का काम कर रही है। किसानों की सुविधा देने का वादा करने वाली सरकार किसानों को परेशान करने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि 20 सितंबर से बाजरा की खरीद कर देनी चाहिए थी ताकि किसान अपने बाजरे को बेचकर मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा कर सके, लेकिन किसानों का बाजरा सरकार की ओर से नहीं खरीदा जा रहा और किसानों व आढ़तियों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि आखिर बाजरे की खरीद कब होगी।
किसान उदय सिंह, रामधन, आशीष, सुरेश, रमेश गुलिया, सोहन ने बताया कि वह बाजरा लेकर पहुंचे हैं, लेकिन खरीद नहीं हो रही है। मार्केट कमेटी प्रबंधन के अधिकारी व कर्मचारी अनाज मंडी परिसर में आने वाले किसानों के नाम व कितनी फसल लेकर आए हैं, रजिस्टर में नोट करते रहे, लेकिन किसानों को कोई भी गेट पास जारी नहीं किया और न ही शुक्रवार को प्राइवेट तौर पर किसी आढ़ती ने कोई खरीद की है। सरकारी खरीद 2500 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बाजरे की सरकारी खरीद होनी है जबकि निजी तौर पर 1850 रुपये ही बाजरे का भाव दिया जा रहा है। इसके चलते किसानों ने बाजरे को सरकारी भाव पर ही देने का फैसला लिया।
वर्जन
बाजरे अभी तक विभाग की ओर से कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। किसानों से अपील की जाती है कि कोई भी बाजरा, धान मंडी में न लेकर आए। क्योंकि सरकारी खरीद होने की जानकारी किसानों व आढ़तियों को मंडी प्रबंधन की ओर से दे दी जाएगी।
सविता सैनी, सचिव मार्केट कमेटी, झज्जर।