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इस बार 50 फुट नहीं 10 फुट के रावण का होगा दहन

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सिलानी गेट के पास रावण का पुतला तैयार करता युवक। - फोटो : Jhjhar
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झज्जर। श्री प्राचीन रामलीला कमेटी की तरफ से करीब ढाई सौ साल बाद कोरोना काल के कारण रावण के बड़े पुतले समेत कुंभकरण व मेघनाथ के पुतलों को नहीं जलाया जाएगा। मात्र परंपरा का निर्वहन करने के लिए इस बार 10 फुट के रावण के पुतले का दहन किया जाएगा और परंपरा के अनुसार धनुष पूजा होगी। 26 अक्तूबर को रामलीला मैदान से भगवान श्री राम की सवारी निकाली जाएगी।
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रामलीला कमेटी के संरक्षक से आजाद दीवान का कहना है कि इस बार प्रशासन की तरफ से न तो दशहरा पर्व की परमिशन मिली है और न ही रामलीला मंचन की। नियमों का पालन करते हुए कमेटी की तरफ से केवल दशहरा पर्व पर केवल छोटे पुतले का दहन किया जाएगा। इस समय रामायण के अखंड पाठ का आयोजन चल रहा है।
कोरोना का असर : प्रशासन की ओर से नहीं मिली संस्थाओं को अनुमति
बहादुरगढ़ में 73 साल में पहली बार नहीं होगा रावण दहन
बहादुरगढ़। कोरोना महामारी के कारण इस बार दशहरा बिना रावण दहन के मनाया जाएगा। मेले के आयोजन के लिए प्रशासन की ओर से अनुमति नहीं मिली। शहर की सबसे पुरानी संस्था श्री सनातन धर्म महाबीर मंदिर परोपकारी सभा और मयंक क्लब की ओर से हर साल मेला ग्राउंड और रेलवे रोड पर 40-50 फीट के रावण, मेघनाथ व कुंभकरण के पुतले जलाए जाते थे।
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श्री सनातन धर्म महाबीर मंदिर परोपकारी सभा के अध्यक्ष हरीश बजाज ने बताया कि वे 73 वर्षों से दशहरे मेले का आयोजन करते आ रहे हैं, लेकिन इस साल पहली बार दशहरे मेले को कोरोना महामारी के चलते रद्द किया गया है। शहर के मेला ग्राउंड में 50-50 फीट के पुतले बनाकर दहन किए जाते थे, लेकिन इस बार पुतले नहीं बनवाए गए हैं। लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर ही यह फैसला लिया गया है।
मुकुटधारी हनुमान की निकाली जाती थी झांकी
परोपकारी सभा की ओर से हर बार दशहरा पर्व पर मेन बाजार में स्थित महाबीर मंदिर से झांकियां निकाली जाती थी। झांकियां शहरवासियों के लिए काफी आकर्षण का केंद्र होती थी। झांकी महाबीर मंदिर से शुरू होकर मेन बाजार, सुभाष चौक, गांधी चौक, किला मोहल्ला, पालिका कॉलोनी से होती हुई मेला ग्राउंड में पहुंचती थी और यहां पर राम व रावण की सेना के बीच युद्ध होता था जोकि लोगों के आकर्षण का केंद्र होता था। अबकी बार शहरवासियों को ऐसा नजारा देखने को नहीं मिलेगा। पूरे बाजार में झांकियों का खूब स्वागत होता था और पुष्प वर्षा होती थी। मुकुटधारी हनुमान द्वारा लोगों को प्रसाद वितरित किया जाता था। वहीं, मयंक क्लब के पूर्व अध्यक्ष दीपक जैन ने बताया कि वे पिछले 30 वर्षों से लगातार दशहरा पर्व पर मेले का आयोजन करते रहे हैं। इस बार कोरोना की वजह से दशहरा पर्व नहीं मनाया जा रहा है। 40 फीट के रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले जलाए जाते थे। अबकी बार कोई कार्यक्रम नहीं किया जा रहा।

सिलानी गेट के पास रावण का पुतला तैयार करते युवक।- फोटो : Jhjhar

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