मंडी के अंदर सब्जी की खरीदारी करते ग्राहक।
झज्जर। सरकार द्वारा सब्जी व फलों पर एक मुश्त मार्केट फीस लगाने के विरोध में शनिवार से आढ़ती और मासाखोरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। मंडी परिसर में सुबह आढ़तियों द्वारा किसी सामान की खरीद नहीं की गई और न ही मासाखोर पहुंचे। पूरी मंडी दिन भर सुनसान रही, लेकिन सब्जी मंडी के बाहर किसानों और रेहड़ी चालकों ने सब्जी और फल बेचे। इससे लोगों को राहत मिली और ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।
मंडी परिसर के बाहर गुरुग्राम रोड पर काफी संख्या में किसान आलू, प्याज, टमाटर, गोभी, बैंगन सहित सभी सब्जियां बेचने के लिए पहुंचे थे। इसके अलावा रेहड़ी चालकों ने फल रखे हुए थे। ऐसे में पहले दिन बहुत ज्यादा दिक्कत आम जनता को नहीं आए। अधिकतर लोगों ने कुछ दिन की सब्जी व फल पहले की स्टॉक करके रखे हुए हैं।
प्रधान बोले टैक्स हटाया जाए
सब्जी मंडी एसोसिएशन के प्रधान नरेंद्र कुमार ने बताया कि उनकी मांग है कि सरकार द्वारा आढ़तियों पर लगाए दो प्रतिशत टैक्स को हटाया जाए। वर्ष 2012 में तत्कालीन हुड्डा सरकार ने मार्केट फीस को माफ कर दिया था, लेकिन कोरोना काल में मौजूदा सरकार ने मार्केट फीस को दोबारा से लागू कर दिया। मार्केट फीस माफ होनी चाहिए। सब्जी मंडियों में तब तक हड़ताल रहेगी, जब तक उनके मांगे नहीं मानी जाती।
44 आढ़ती और 300 मासाखोर हड़ताल पर रहे
झज्जर सब्जी मंडी में 44 आढ़ती और लगभग 300 मासाखोर प्रतिदिन सब्जियों व फलों का व्यापार करते हैं। शनिवार को इनकी हड़ताल का पहला दिन रहा। यदि हड़ताल बढ़ती है तो आने वाले दिनों में आम जनता के लिए समस्या पैदा हो जाएगी। वहीं किसान स्थानीय फसल को मंडी परिसर से बाहर बेच रहे हैं।