पंचायत चुनाव के प्रथम चरण की अधिसूचना जारी होने के बाद गांवों की चौपालों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। चौधर को लेकर नई शर्तों के हिसाब से तैयार हो रहे राजनीतिक अखाड़े में युवा उम्मीदवार ज्यादा आगे आए हैं।
तो जाहिर है कि उनके प्रचार का तरीका भी नया होगा। इस बार युवा डोर-टू-डोर प्रचार की बजाए सोशल साइट्स का ज्यादा सहारा ले रहे हैं।
उम्मीदवार फेसबुक, वाट्सअप, टवीट्र, मोबाइल मैसेज सहित अन्य तौर-तरीकों से अपनी-अपनी मजबूत दावेदारी ठोंक रहे हैं। वहीं बुजुर्ग भी चौपाल पर हुक्के की गुड़गड़ाहट में भावी प्रत्याशियों का भविष्य तय करने में लगे हुए हैं।
युवा उम्मीदवारों शिक्षा, विकास, रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने सहित अन्य तरह के दावे कर अपना वोट बैंक मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।
युवा वर्ग तो सोशल साइट की मदद प्रचार-प्रसार के लिए अधिक कर रहे हैं। बड़े गांवों में तो हालात काफी बदले नजर आ रहे हैं। तो वहीं छोटे गांव भी इसमें पीछे नहीं हैं।
सुरक्षा को लेकर अलर्ट
पंचायत चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। जिन लोगों के पास लाइसेंसी हथियार है उन्हें जल्द से जल्द हथियार जमा कराने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
यही नहीं अवैध हथियार रखने वालों पर पुलिस की पैनी निगाह है। गुप्त सूचनाओं के आधार पर उन पर शिकंजा कसने का पूरा प्रयास है।
यही नहीं जिन गांवों में चुनाव को लेकर कुछ अप्रिय स्थिति होने का अंदेशा रहता है वहां पर पुलिस अपने स्तर पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की रणनीति पर काम कर रही है।
यही नहीं चुनाव में किसी तरह के बाहुबल का प्रयोग न हो इसको ध्यान रखते हुए पहलवानों पर भी पूरी नजर रखेगी। झज्जर के साथ सटे दिल्ली क्षेत्र से आने वाले लोगों पर भी पुलिस अपनी पैनी नजर बनाए रखेगी ताकि चुनाव में किसी तरह का कोई खलल न पड़े।