काफी लंबे अरसे से किसानों की नई अनाज मंडी की मांग को पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसलिए शहर से सटे गांव बालोर की 56 एकड़ जमीन पर मंडी बनाई जानी है।
मंडी को लेकर किसानाें को सेक्शन-6 के नोटिस जारी कर दिए गए हैं, लेकिन बालोर के किसानाें ने किसी भी सूरत में जमीन न देने की बात कहते हुए विरोध करना शुरू कर दिया है। गांव के सरपंच संजय के नेतृत्व में किसान, रामपाल, रामफल, जयप्रकाश, गिरधारी, रणबीर आदि बुधवार को अनाज मंडी में एकत्र हुए शासन प्रशासन के विरोध में नारेबाजी की। इसके विरोध स्वरूप एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।
सरपंच संजय का कहना है यहां कि 552 एकड़ जमीन का पहले ही सरकार अधिग्रहण कर चुकी है और अब किसानों के पास 60 एकड़ के आसपास जमीन बची है, जिसमें से भी 56 एकड़ का अधिग्रहण अनाज मंडी के लिए किया जा रहा है, जिससे किसानों में काफी रोष है।
उन्हाेंने कहा कि जिस जमीन पर अधिग्रहण का प्रयास हो रहा है। वह बेशकीमती और उपजाऊ है। किसान इस जमीन पर खेती कर अपने परिवार की आजीविका चला रहे हैं। लेकिन सरकार की नीयत साफ नहीं है और वह किसानों की जमीन को जबरन अधिग्रहण करने में तुली है। ग्रामीणों ने एसडीएम को ज्ञापन देकर सरकार से मांग की है कि जमीन का अधिग्रहण रद किया जाए।
यदि सरकार की हठधर्मिता जारी रही तो किसान धरने-प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे। बालोर गांव के कुछ किसानों का कहना है कि अनाज मंडी के लिए सरकार पहले भी अधिग्रहण की कोशिश कर चुकी है, लेकिन पंजाब एंड हरियाणा उच्च न्यायालय ने उस अधिग्रहण प्रक्रिया को रद कर दिया था। जिसके बाद ग्रामीणाें को राहत मिली थी, लेकिन अब फिर से सरकार यहां की 56 एकड़ जमीन को अधिग्रहीत करने का प्रयास कर रही है। लेकिन किसान अपनी उपजाऊ जमीन को अधिग्रहण नहीं होने देंगे।
---फोटो 11 : एसडीएम को ज्ञापन सौंपते बालोर के किसान।