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Jhajjar-Bahadurgarh News: डॉक्टरों ने दिए दो महीने, प्रवीण की हिम्मत ने पूरी जिंदगी

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फोटो-69: प्रवीण शर्मा। - फोटो : संवाद
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बहादुरगढ़। लाइनपार क्षेत्र की वत्स कॉलोनी निवासी और शक्ति विद्या मंदिर स्कूल के मालिक 69 वर्षीय प्रवीण शर्मा आज उन लोगों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। वे कहते हैं कि कैंसर में मन के हारे हार है और मन के जीते जीत।
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ब्लड कैंसर की चौथी स्टेज होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर इस बीमारी को मात देकर आज पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। भारत विकास परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने बताया कि 4 जून 2011 को उन्हें अचानक तेज बुखार हुआ।
शुरुआत में इसे सामान्य समझा गया लेकिन जब ब्लड की जांच करवाई गई तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। उन्हें ब्लड कैंसर था और वह भी चौथी स्टेज पर। डॉक्टरों ने उन्हें महज दो माह का समय दिया था। यह खबर किसी के भी मनोबल को तोड़ सकती थी लेकिन प्रवीण चुनौती के रूप में स्वीकार किया।
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उन्होंने दिल्ली के राजीव गांधी कैंसर अस्पताल में डॉक्टर डॉ. दिनेश बुरानी की देखरेख में इलाज शुरू करवाया। 14 नवंबर 2011 से उनका इलाज प्रारंभ हुआ। बीमारी की गंभीरता को देखते हुए उन्हें करीब 28 दिन तक आईसीयू में रहना पड़ा और इस दौरान लगभग 200 बोतल खून चढ़ाया गया।
कीमोथैरेपी के माध्यम से इलाज चला जो वर्ष 2013 तक जारी रहा। इसके बाद भी कुछ समय तक नियमित फॉलोअप किया गया।
कैंसर में बड़ी भूमिका मानसिक मजबूती की
प्रवीण शर्मा का कहना है कि कैंसर जैसी बीमारी में सबसे बड़ी भूमिका मानसिक मजबूती की होती है। बीमारी का पता चलने के बाद मैं कभी नर्वस नहीं हुआ। हमेशा सकारात्मक सोच रखी। मुझे अपने शरीर और मन की दृढ़ इच्छाशक्ति पर पूरा भरोसा था कि मैं ठीक हो जाऊंगा। आज वे पूरी तरह स्वस्थ हैं और सामान्य, सक्रिय व खुशहाल जीवन जी रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी वे निरंतर सक्रिय हैं और समाज को सकारात्मक संदेश दे रहे हैं।
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