बहादुरगढ़। नूना माजरा स्थित महाराजा अग्रसेन अस्पताल में सीवर सफाई के दौरान प्लंबर की मौत के मामले ने वीरवार को तूल पकड़ लिया। मृतक के परिजनों, ग्रामीणों और दलाल खाप 84 के प्रधान भूप सिंह के नेतृत्व में नागरिक अस्पताल में तीन घंटे तक पंचायत हुई।
सभी ने अस्पताल प्रबंधन से पीड़ित परिवार को एक करोड़ मुआवजा, सुनील की पत्नी को सुनील के वेतन के बराबर पेंशन जीवन भर देने और बच्चे को मेडिकल सुविधा की मांग रखी है। उनका कहना है कि सुनील परिवार का इकलौता कमाने वाला था। साथ ही कहा कि जब तक उनकी मांग नहीं मानी जाती, तब तक वे पोस्टमार्टम नहीं कराएंगे। इसके चलते वीरवार को शव का पोस्टमार्टम नही हो पाया।
शाम के समय हुई पंचायत में तहसीलदार और नायब तहसीलदार भी पहुंचे लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया। ऐसे में दलाल खाप 84 के प्रधान भूप सिंह ने शुक्रवार को सुबह 10 बजे फिर से मामले को लेकर पंचायत बुलाई है। इस पंचायत में कोई बड़ा फैसला लिया जाएगा।
गौरतलब है कि महाराजा अग्रसेन अस्पताल में सोमवार को प्लंबर का काम करने वाले सुनील निवासी डाबोदा खुर्द से सीवर सफाई का कार्य कराया गया था। इसमें उनकी मौत हो गई। पत्नी मीनू की शिकायत पर प्रबंधन के आठ लोगों के खिलाफ बुधवार को एफआईआर दर्ज हुई। मृतक की पत्नी ने आरोप लगाया था कि उनके पति को सफाई कार्य के लिए सीवर में क्यों उतारा गया, जबकि वे प्लंबर का काम करते थे। इसकी जानकारी भी परिवार से छिपाई गई। इस हादसे में अन्य पांच कर्मचारी भी घायल है इनमें सिलोठी निवासी कपिल की हालत भी चिंताजनक बताई गई है। घटना के बाद से ग्रामीणों और परिजनों में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ भारी रोष बना हुआ है।
वीरवार को काफी संख्या में ग्रामीण सुबह नागरिक अस्पताल पहुंचे और महाराजा अग्रसेन अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए। बिना सुरक्षा उपकरणों के कर्मचारियों को सीवर में उतार दिया गया, जिसके कारण यह हादसा हुआ। ग्रामीणों ने प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुई तो शुक्रवार को होने वाली पंचायत में आगे की रणनीति तय की जाएगी। ग्रामीण प्रदीप दलाल और जयवीरेंद्र ने कहा कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से न तो कोई जिम्मेदार प्रतिनिधि बातचीत के लिए आया और न ही मांगों पर गंभीरता दिखाई गई। इस वजह से रोष और बढ़ रहा है।
गौरतलब है कि सोमवार को महाराजा अग्रसेन अस्पताल परिसर में सीवरेज सफाई के दौरान पांच कर्मचारी जहरीली गैस की चपेट में आ गए थे। इनमें से प्लंबर सुनील की मौत हो गई, जबकि अन्य कर्मचारियों का इलाज जारी है। मामले में अस्पताल प्रबंधन समेत आठ लोगों के खिलाफ केस भी दर्ज किया जा चुका है।