फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मानसून सिर पर नालों व ड्रेनों की सफाई नहीं हुई पूरी

विज्ञापन
जलखुंबी व कीचड़ से भरा नाला। - फोटो : Jhjhar
विज्ञापन
झज्जर। मानसून सिर पर है और फिलहाल तक न तो शहर के अंदर नालों की सफाई का कार्य पूरा हो पाया है और न ही बाहरी क्षेत्र से पानी की निकासी की ड्रेन का कार्य पूरा हो पाया है। समय पर नालों व ड्रेनों की सफाई का कार्य पूरा न होने से प्री मानसून की बारिश में ही जिले की हजारों एकड़ भूमि जलमग्न हो जाती है। जिससे किसानों को काफी नुकसान होता है। वहीं शहरी क्षेत्र में भी जल भराव की स्थित होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन

बता दें कि बारिश के दौरान शहर में पानी निकासी की जिम्मेदारी तीन विभागों पर है। शहर से नगर परिषद व जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग और शहर के बाहरी क्षेत्र के अलावा ग्रामीण क्षेत्र से पानी की निकासी की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है। जून का करीब एक सप्ताह बीत चुका है। 15 जून के आसपास प्री मानसून की बारिश शुरू हो जाती हैं और 25 जून के आसपास क्षेत्र में मानसून की बारिश शुरू हो जाती हैं।
-नाला ओवरफ्लो होकर पानी भर रहा खेतों में, फसलें हो रहे बर्बाद
शहर के सांपला रोड से लेकर रोहतक रोड, बेरी रोड, कोसली रोड से होते हुए रेवाड़ी रोड पर पंप हाउस तक करीब 4 किलोमीटर लंबा नाला इन दिनों किसानों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। नाले की सफाई न होने की वजह से रेवाड़ी रोड पर स्थित पंप हाउस तक पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इस पंप हाउस के पूरे समय दो पंप भी चल पाते इतना ही पानी पहुंच पा रहा है। नाला ओवरफ्लो होने की वजह से आसपास की भूमि में पानी भर जाता है। थोड़ी सी बारिश होने के बाद भी यहां पर खेतों में नाले का पानी खड़ा हो जाता है। बारिश के दिनों में आसपास की भूमि व शहर के पानी की निकासी इसी नाले के माध्यम से होती है। रेवाड़ी रोड पंप हाउस से ड्रेन के माध्यम से नाले के पानी को ड्रेन नंबर आठ तक पहुंचाया जाता है। इसके अलावा शहर व आसपास के पानी की निकासी के लिए कोई दूसरी व्यवस्था नहीं है।
विज्ञापन

- सबसे ज्यादा बेरी क्षेत्र प्रभावित
झज्जर जिले में नहरों व माइनरों के साथ लगता एरिया पहले ही सेम की समस्या से प्रभावित रहता है और इसी क्षेत्र में हर बार बारिश से पानी भर जाता है। सबसे अधिक पानी कस्बा बेरी के चारों तरफ, भागलपुरी, बाघपुर, जहाजगढ़, धौड़, दुजाना, दुबलधन, वजीरपुर, अच्छेज, पहाड़ीपुर, छुछकवास, मातनहेल, अकेहड़ी मदनपुर गांव सहित जवाहरलाल नेहरू कैनाल के साथ लगता क्षेत्र, बाबरा, ग्वालीसन, खापड़वास, भिंड़ासवास झील के साथ लगते क्षेत्र में भी जलभराव की स्थिति बनती है।
- मुख्य ड्रेनों की सफाई भी नहीं हुई है पूरी
मानसून के सीजन से पहले प्रशासन ने बाढ़ नियंत्रण कार्य लगभग पूरा कर लिया जाता है। ग्रामीण क्षेत्र में पानी की निकासी की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग के पास है। सिंचाई विभाग ने अब तक दस ड्रेनों की सफाई कर चुका है। मानसून में जिले में भरने वाले पानी की निकासी के लिए करीब 46 ड्रेन बनाई गई है। इनकी लंबाई करीब 225 किलोमीटर है। इन ड्रेनों को मुख्य रूप से ड्रेन नंबर आठ व आउटफाल ड्रेन नंबर आठ से जोड़ा गया है। जब मुख्य ड्रेनों में पानी का स्तर कम होता है तो लिंक ड्रेनों में पानी बह कर चलता है। ड्रेनों में पानी का स्तर बढ़ जाता है तो उस दिशा में लिंक ड्रेनों के गेट बंद कर दिये जाते हैं और पानी को पंपों के माध्यम से लिफ्ट करके मुख्य ड्रेनों व नहरों में डालना शुरू कर दिया जाता है। जब स्थिति बाढ़ जैसी बनती नजर आती है तो जिले की सभी नहरों, माइनरों व ड्रेनों का प्रयोग पंप सेट लगा पानी की निकासी के लिए किया जाता है।
जिले में नहरों की स्थिति
मुख्य नहर तीन : जवाहर लाल नेहरू कैनाल, झज्जर डिस्ट्रिब्यूटरी, एनसीआर चैनल
- कुल नहर व माइनर : 56
- जिले में टेल : 49
- मुख्य ड्रेन : ड्रेन नबंर आठ
- ड्रेन : 46
- ड्रेनों की लंबाई : 244.66 किलोमीटर
- कुल पंप सेट : करीब 300
- पंपों की कुल क्षमता : 1444 क्यूसिक
ड्रेनों की सफाई का कार्य चल रहा है। 15 जून तक सभी ड्रेनों की सफाई का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। शहर के बाईपास के साथ लगते नाले की सफाई का कार्य भी शुरू किया जा रहा है।
-सतीश कुमार, एसई, सिंचाई विभाग, झज्जर।
शहर में नगर परिषद के पास आठ नाले हैं। नालों की सफाई का कार्य शुरू कर दिया गया है। 15 जून से पहले नालों की सफाई का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इस बार जिन विभागों के नाले शहर में हैं। उन विभागों को ही नालों की सफाई की जिम्मेदारी दी गई है।
विज्ञापन

-अरुण नांदल, ईओ, नगर परिषद, झज्जर।

स्टेडियम के साथ से गुजरने वाले नाले में भरी गंदगी।- फोटो : Jhjhar

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें