बेरी। लॉकडाउन के चलते माता भीमेश्वरी मंदिर के साथ-साथ शहर के अन्य छोटे मंदिर बंद पड़े हैं। लॉकडाउन में जहां माता भीमेश्वरी मंदिर व अन्य मंदिर में भक्तों का आना बंद हो गया है वहीं मंदिर दान आना भी बंद हो गया है। इसके साथ हवन-पूजन और यज्ञ पर भी रोक लगी हुई है। धार्मिक कार्यक्रमों के बंद होने से मंदिरो में दान-दक्षिणा नहीं आ रही। इससे मंदिर प्रबंधकों व पुुजारियों को खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा है।
- जमा किए रुपये से चला रहे खर्च
बेरी के प्राचीन इमली वाले मंदिर में रहने वाले यूपी निवासी पुजारी कंथा राम शुक्ला ने बातया कि पिछले 25 वर्षों से बेरी में रह रहा हूं और लॉकडाउन में चलते मंदिर बंद पड़े हैं। हवन-पूजन, धार्मिक कार्यक्रमों पर रोक लगी हुई। लॉकडाउन से पहले जो रुपये एकत्रित किए हुए थे। उससे लॉकडाउन में खर्च चला रहे हैं। कोरोना के कारण अर्थिक संकट ने घेर लिया है। खर्चे पहले की तरह है और आमदनी बिल्कुल ही खत्म है।
- पुजारियों के लिए बहुत ही कठिन समय
घांघसर मंदिर के रहने वाले कबूलपुर निवासी पुजारी नवीन कुमार दीक्षित का कहना है पिछले 4 वर्षों से घांघसर मंदिर में पुजारी का जिम्मा संभाले हुए है। कोरोना के कारण आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। पहले जैसे पूजा पाठ हवन, कथा कीर्तन, भजन, पूजा का आयोजन नहीं हो रहे हैं। मंदिर बंद होने के कारण घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा है। मंदिर खुला होने से थोड़ा बहुत दान आ जाता था। इससे खर्चा ठीक से चल जाता था। अब कमाई की बात दूर घर खर्चा चलाने के आगे संकट खड़ा हो गया है।
- माता भीमेश्वरी मंदिर में हर अष्टमी के दिन उमड़ती है भक्तों की भीड़
माता भीमेश्वरी देवी मंदिर में हर अष्टमी के दिन भक्तों की भीड़ उमड़ती है, मंदिर में हजारों में चंदा भी आता है। लेकिन लॉकडाउन में मंदिर बंद होने से हर माह की अष्टमी के दिन मंदिर सुनसान पड़ा रहा।
- एकमात्र मंदिर जहां मूर्ति एक, मंदिर दो
मां भीमेश्वरी देवी का एकमात्र मंदिर हैं जहां पर मां की मूर्ति एक है, लेकिन मंदिर दो हैं। मां भीमेश्वरी देवी को सुबह बाहर वाले मंदिर में सुबह 5 बजे लाया जाता है। दोपहर 12 बजे बाद मां की मूर्ति को पुजारी अपनी गोद में उठाकर शहर के अंदर वाले मंदिर में लेकर जाते है। बाद में रातभर अंदर वाले मंदिर में आराम करती है।
- 9 दान पात्रों में 35 लाख 92 हजार 909 रुपये आया था चढ़ावा
माता भीमेश्वरी देवी मंदिर में अक्टूबर 2020 में नवरात्र के दौरान 9 दान पात्रों में 35 लाख 92 हजार 909 रुपये का चढ़ावा आया था। अप्रैल में माह नवरात्रों के दौरान चढ़ावे की राशि दान पात्रों में रखी हुई है, उनकी गिनती अभी शुरू नही हुई। गिनती होने के बाद ही पता लग पाएगा कितना चढ़ावा आया है।
- कोरोना के चलते पुजारी के पुत्र पंकज वशिष्ठ हो चुका निधन
माता मंदिर के मुख्य पुजारी पुरुषोत्तम वशिष्ठ के बड़े बेटे पंकज वशिष्ठ का नवरात्र में कोरोना से निधन हो चुका है। अब मंदिर में आरती का जिम्मा अन्य छोटे पुजारी ने संभाल रखा है।