झज्जर। सुलौधा गांव निवासी चार वर्षीय हिमांश की आंवला फंसने से हुई दर्दनाक माैत के बाद बच्चे का परिवार बुरी तरह टूट चुका है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ताऊ का आरोप है कि स्कूल की बस का चालक उसे बेसुध हालत में घर के बाहर खड़ी उसकी दादी की गोद में देकर गया। उसकी नांक से खून बर रहा था। उधर मृतक के शव का गठित बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया। शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया, जिसके बाद बच्चे का अंतिम संस्कार किया गया। उसकी माैत दम घुटने से हुई थी।
हिमांश के ताऊ दिनेश ने बताया कि मंगलवार सुबह हिमांश तैयार होकर किड्स स्कूल गुरुकुल में गया था। तब तक वह बिल्कुल स्वस्थ था। दोपहर लगभग डेढ़ बजे स्कूल की बस में चालक हिमांश को लेकर घर पर आया। हिमांश चालक की गोद में बेसुध सा था। चालक तुरंत बेसुध हालत में हिमांश को घर के बाहर खड़ी उसकी दादी को देकर गाड़ी लेकर भाग गया। दादी ने हिमांशु को देखा तो उसके पैरों में जूते तक नहीं थे उसकी नाक से खून आ रहा था। उसकी दादी को कुछ समझ में नहीं आया। वह चिल्लाने लगी। परिवार के सदस्य हिमांश को तुरंत झज्जर के निजी अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टरों ने उसके गले से आंवला बाहर निकाला और उसे मृत घोषित कर दिया। हिमांश परिवार का इकलौता था और उसे बड़े लाड़ प्यार से पाला था। हादसे के बाद से ही परिवार का रो-रोककर बुरा हाल है। हिमांश की मां बार-बार अपने बेटे को याद कर बेसुध हो रही है। हिमांश के पिता दीपक निजी स्कूल में शिक्षक है।
परिजनों को मलाल...घर की बजाय अस्पताल ले जाते तो बच जाती जान
परिवार के सदस्यों ने कहा कि इस मामले में स्कूल प्रबंधक की सरासर लापरवाही है। उनकी लापरवाही से बच्चे की मौत हुई है। यदि उनके बच्चे को घर भेजने की बजाय सीधा अस्पताल ले जाते तो शायद आज हिमांश जिंदा होता और उनके बीच खेल रहा होता।
शिक्षा विभाग अब तक बेखबर
इस पूरे घटनाक्रम के 24 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी न तो शिक्षा विभाग और न ही महिला एवं बाल विकास विभाग को इसकी खबर है। दोनों विभागों के अधिकारियों से संपर्क किया गया तो उन्हें घटना के बारे में जानकारी ही नहीं थी। साथ ही यह भी नहीं पता था कि यह प्ले स्कूल नियमों व मान्यता पर चल रहा था या नहीं?
एक्सपर्ट व्यू...
बच्चे की मौत सांस न आने के कारण हुई है। विसरा जांच के लिए भेज दिया गया है। जांच के बाद ही असली कारण तभी पता लग जाएंगे। दम घुटने या सांस की नली में कुछ फंस जाने की स्थिति में मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है। कई बार खाना खाते समय खाने का टुकड़ा सांस की नली में फंस जाता है। इसकी वजह से सांस की नली ब्लाक हो जाती है। सांस की नली ब्लाक होने पर चोकिंग हो जाती है और व्यक्ति की सांस अटक जाती है। ऐसी स्थिति में हेमलिच मेन्यूवर का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे काफी राहत मिलती है और मरीज की जान बच जाती है।
डाॅ. नरेश दहिया, चिकित्सा अधीक्षक, सिविल अस्पताल, झज्जर
ऐसे करे हेमलिच मेन्यूवर
-सबसे पहले व्यक्ति को सीधा खड़ा करें।
-इसके बाद उसके पीछे खडे़ होकर व्यक्ति को आगे की तरफ झुकाएं।
-अपने हाथों से उसकी पीठ पर पांच से छह पर थोड़ी तेजी से तेज थपकी लगाए।
-इसके बाद हाथों को उसके पेट के पास से जाकर मुट्ठी बांध ले और नाभि के पास रखे।
-अब व्यक्ति को अंदर से बाहर की तरफ झटका दे।
-कम से कम पांच बार झटका देना चाहिए।
-इसके बाद खांसी आए तो ठीक अन्यथा दोबारा करे और चिकित्सक के पास ले जाए।
ये था पूरा मामला
सुलौधा निवासी दीपक के चार साल का बेटा हिमांश किडस स्कूल गुरुकुल झज्जर में पढ़ने के लिए गया था। स्कूल में हिमांश ने आवले के पेड़ से आवला उठाकर खा लिया। इससे आंवला उसके गले में फंस गया। परिजनों के आरोप हैं कि स्कूल प्रबंधक ने उसके बच्चे को डॉक्टर को इलाज के लिए नहीं भेजा बल्कि मृत अवस्था में स्कूल बस में बैठाकर ड्राइवर द्वारा घर भेज दिया। जैसे ही उसका बच्चा घर आया तो वह उसे लेकर मेरे बच्चे प्राइवेट अस्पताल झज्जर लेकर आया, जहां डॉक्टर ने इलाज एक दौरान आंवला निकाला और बच्चे को मृत घोषित कर दिया। परिजनों का आरोप हैं कि यह हादसा स्कूल प्रबंधक की लापरवाही से हुआ है। पुलिस ने मृतक के बच्चे के पिता की शिकायत पर स्कूल प्रबंधक के खिलाफ केस दर्ज कर किया है।
वर्जन
बच्चे के पिता की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। फिलहाल जांच जारी है।
बलदेव सिंह, शहर थाना प्रभारी, झज्जर
वर्जन
प्ले स्कूल में बच्चे की मौत का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। प्ले स्कूल महिला एवं बाल विकास विभाग के अधीन आते हैं और वही कार्रवाई भी करते हैं।
राजेश कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी, झज्जर
वर्जन
यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। इसे देखा जाएगा। जहां तक मान्यता का सवाल है तो कुछ स्कूल ने आवेदन किया हुआ है और कुछ को मान्यता मिली भी हुई है। स्कूल की मान्यता संबंधी जानकारी वह वीरवार को दे पाएंगी।
प्रियंका, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, झज्जर