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Jhajjar-Bahadurgarh News: टमाटर बेचकर संडील के सुरेंद्र ने किया कमाल

Mon, 07 Aug 2023 01:29 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
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06जेएनडी06: जानकारी देते हुए किसान सुरेंद्र।
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जींद। बागवानी विभाग के अधिकारियों की ओर से लगाए गए जागरूकता शिविरों ने संडली निवासी सुरेंद्र की जिंदगी संवारने का काम किया है। विभाग के अधिकारियों ने संडील गांव में कई बार शिविर लगाए और इसमें ग्रामीणों को बागवानी की फसलों से होने वाली आमदनी के बारे में जागरूक किया। इस पर सुरेंद्र ने एक एकड़ में टमाटर लगाए जोकि किसान ने नौ लाख रुपये में बेचे।

किसान सुरेंद्र ने बताया कि वह सब्जी की खेती करने का इच्छुक नहीं था, लेकिन बागवानी विभाग के सलाहकार डॉ. असीम जांगड़ा ने कई बार उनको इसके बारे में व्यक्तिगत तौर पर समझाया और विभाग की ओर से दिए जाने वाले अनुदान के लिए भी बताया जिनकी सलाह से उन्होंने एक एकड़ में टमाटर लगाने का रिस्क उठाया था, लेकिन टमाटर शुरूआत में 400 रुपये क्विंटल बिका, इसके बाद इसके दाम बढ़ते गए, जिससे उसको ज्यादा मुनाफा होने लगा। उन्होंने बताया कि 300 क्विंटल टमाटर तो उन्होंने चार से 80 रुपये प्रति किलो के मध्य के रेट में भेजा। इसके बाद 100 क्विंटल टमाटर का उनको बेहद ही अच्छा भाव मिला। यह टमाटर उन्होंने 80 से 140 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचा। उन्होंने इस टमाटर को ज्यादातर नरवाना मंडी तो इसके बाद पंजाब के लुधियाना, चंडीगढ़ तक भी पहुंचाया। जहां पर सबसे अधिक रेट मिला। सुरेंद्र ने बताया कि उन्होंने अब फिर दोबारा से टमाटर लगाने की तैयारी की है। उनकी पौध तैयार हो चुकी है। अब खेत की जुताई करके वह आगामी 15 दिन बाद फिर से इसी खेत में टमाटर लगाएंगे।
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मल्चिंग विधि, बंबू बास व ड्रिप की अपनाई तकनीक

किसान सुरेंद्र ने नींबू की फसल में लगाने के बाद मल्चिंग विधि के तहत खरपतवार को रोका। इसके बाद ड्रिप से सिंचाई की व बंबू बास पर टमाटर के पौधों को चढ़ाया, ताकि इनको खराब होने से बचाया जा सके । इसमें स्प्रे का भी कोई खर्च नहीं हुआ। इन तीनों विधियों पर किसानों को अनुदान मिल गया। इसके अलावा विभाग की टीम डीएचओ डॉ. विजय पान्नू के साथ तीन बार दौरान करके गई। इसमें आने वाली बीमारियों के बारे में बताया।
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अब दो एकड़ में लगाएगा टमाटर

किसान सुरेंद्र के पास कुल दो एकड़ जमीन है। इस बार उसने दोनों एकड़ में टमाटर लगाने के लिए पौध तैयार की है। इस बार वह अगेती किस्म के टमाटर ही लगाएगा, ताकि भाव भी अधिक मिले। उन्होंने बताया कि परंपरागत खेती में वर्ष में दोनों एकड़ में 60 हजार रुपये की भी बचत कभी नहीं हुई। इस बार नौ लाख रुपये के टमाटर बिके हैं। यह उनके लिए बहुत गर्व की बात है।


06जेएनडी06: जानकारी देते हुए किसान सुरेंद्र।

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