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हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया स्टे, 6 मार्च को होगी सुनवाई

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न्यायाधीश दीप्ति की अदालत ने इसी साल 3 जनवरी को विधायक राजेंद्र सिंह जून के परिवार की 2600 गज जमीन पर उनके पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके खिलाफ लोक निर्माण विभाग सुप्रीम कोर्ट पहुुंच गया। लोनिवि की अर्जी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को निचली अदालत के फैसले पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई के लिए 6 मार्च की तिथि तय की है।
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अमीलाल वर्सेज स्टेट ऑफ हरियाणा केस में लोक निर्माण विभाग और स्थानीय विधायक राजेंद्र सिंह जून के परिवार की 2600 गज जमीन पर 33 साल से विवाद चल रहा था। अमीलाल विधायक राजेंद्र सिंह के पिता के भाई थे। स्थानीय अदालत ने राजेंद्र सिंह जून के परिवार (वारिस विक्रम जून और अशोक जून) के पक्ष में फैसला सुनाया था। फैसले के बाद विधायक के बेटे विक्रम जून ने एक हफ्ते पहले अपनी जमीन पर कब्जा ले लिया था। उस जमीन पर एक्सईएन का आवास बना हुआ था। अब वहां पर विधायक राजेंद्र सिंह जून के नाम का बोर्ड लग गया है। अभी लोक निर्माण विभाग के दफ्तर वाले हिस्से पर अशोक जून को कब्जा नहीं मिल पाया है। इस बीच लोक निर्माण विभाग ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 13 जनवरी को याचिका दायर कर दी। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायाधीश हृषिकेश रॉय की खंडपीठ ने उक्त याचिका पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के आदेश पर स्टे लगा दिया। मामले में वकील अमन लेखी एडिशनल सॉलिसिटर जनरल, अहमद कुमार गुप्ता एडिशनल एडवोकेट जनरल (एएजी), आलोक शर्मा एसोसिएट एडवोकेट इस मामले में सरकार का पक्ष रख रहे हैं। सुनवाई के दौरान विभाग की ओर से चीफ इंजीनियर चंद्रमोहन, एसई वीएस मलिक भी मौजूद रहे।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पर लगाया है स्टे : पठानिया
अदालत के फैसले के खिलाफ विभाग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उक्त आदेश पर स्टे लगाया है।
- केएस पठानिया, एक्सईएन, लोक निर्माण विभाग
कोर्ट के आदेशों पर लिया है कब्जा : विक्रम जून
गौरतलब है कि 2 मई 1986 को भी स्थानीय अदालत ने जमीन मालिकों के हक में फैसला सुनाया था। उसके बाद सरकार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां भी जीत जमीन मालिकों की ही हुई थी। हाईकोर्ट ने 31 जनवरी 2019 को निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया था। इन आदेशों की पालना करवाने के लिए पक्षकारों ने एसीजे कोर्ट में याचिका लगाई। इस पर एसीजे कोर्ट ने 3 जनवरी 2020 को फैसले के क्रियान्वयन के आदेश जारी कर दिए। कोर्ट बैलिफ को आदेशों का पालन करवाकर 6 फरवरी तक कोर्ट में रिपोर्ट पेश करनी है। विक्रम जून ने बताया कि उन्होंने कब्जा कार्रवाई कोर्ट के आदेशों के तहत की है।
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