राष्ट्रव्यापी हड़ताल का जिले में व्यापक असर दिखा। रोडवेज बसों का चक्काजाम रहा, बैंकों में हड़ताल रही, नागरिक अस्पताल में एनएचएम के कर्मियों ने काले बिल्ले लगाकर रोष जताया, रिटायर्ड संघ भी धरने में शामिल हुआ और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने शहर में प्रदर्शन कर हड़ताल की। सबसे बुरा हाल मुसाफिरों का रहा, क्योंकि झज्जर डिपो की करीब सौ बसों में से एक भी बस सड़क पर नहीं उतरी। जिसके कारण लोगों को भारी तकलीफों का सामना करना पड़ा। खासकर महिलाओं और बच्चों को। वहीं दूसरी तरफ प्रशासन ने अपनी तरफ से मुसाफिरों के लिए कोई इंतजाम नहीं किया। पुलिस भी अपनी पीसीआर में आराम से बैठी लोगों को परेशान होता देखती रही। बता दें कि बसों के न चलने के कारण झज्जर डिपो को करीब दस लाख का नुकसान हुआ।
वहीं बैंकिंग कर्मचारियों ने भी हड़ताल कर सेवाएं बंद रखी। जिसके चलते भी करोड़ों का लेन-देन प्रभावित हुआ। हड़ताल के चलते विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने स्थानीय जलघर में डेरा जमाया और दिनभर सरकार विरोधी नारेबाजी करते रहे। हड़ताल में रिटायर्ड कर्मचारियों ने भी हिस्सा लिया और धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। बाद में विभिन्न विभागों के कर्मचारी जुलूस की शक्ल में सड़कों पर उतर आए और जलघर से लेकर अंबेडकर चौक तक प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
उधर, नागरिक अस्पताल में एनएचएम के तहत कार्यरत कर्मचारियों ने काले बिल्ले लगाकर रोष प्रकट किया। कर्मचारियों ने धारा 144 की धज्जियां उड़ाई। कर्मचारियों ने जहां विभिन्न स्थानों पर एकत्रित होकर नारेबाजी की, वहीं शहर में प्रदर्शन भी किया। वहीं सुरक्षा के मद्देनजर शहर में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए। बस स्टैंड परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी शहर भर में दौरा करते रहे।
निजी बस चालकों ने कूटी चांदी
राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण जहां रोडवेज को 10 लाख का चूना लगा। वहीं निजी बस चालकों ने जमकर चांदी कूटी। स्थिति यह रही कि बसों के अभाव के कारण लोगों को मजबूर होकर निजी बसों की छतों पर बैठकर सफर करना पड़ा। शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर लोगों की भी लोगों की भीड़ बसों का इंतजार करती रही। मजबूरी वश उन्हें प्राईवेट वाहनों में लटक कर अपने गंतव्य की ओर जाना पड़ा।
बैंकिंग हड़ताल से लेन-देन हुआ प्रभावित
राष्ट्रव्यापी हड़ताल में सिंडिकेट, ओबीसी, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला सहित अन्य बैंकों के कर्मचारियों ने भाग लिया। कर्मचारियों ने कामकाज ठप रखा। जिसके चलते लेनदेन प्रभावित हुआ। स्टेट बैंक ऑफ पटियाला में कामकाज न होने के चलते सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गो को हुई। बुजुर्ग सुबह से ही पेंशन लेने के लिए बैंक में पहुंचें। हड़ताल होने की सूचना मिलने पर उन्हें निराशा हाथ लगी।
लघु सचिवालय परिसर में भी नहीं दिखी पहले जैसी चहल-कदमी
हड़ताल का असर लघु सचिवालय परिसर में भी देखने को मिला। हालांकि यहां कार्यरत कर्मचारियों ने हड़ताल में भाग तो नहीं लिया। लेकिन आवाजाही पहले की अपेक्षा कम रही। जिसके चलते लघु सचिवालय परिसर में पहले जैसी चहल-कदमी दिखाई नहीं दी।
इन विभागों के कर्मचारियों ने लिया भाग
विभाग कुल कर्मचारी हड़ताल में भाग लेने वाले कर्मचारी
रोडवेज 627 287
बिजली निगम ङ654 525
पब्लिक हेल्थ 428 72
सिंचाई विभाग 184 13
एमपीएचडब्लयू 234 04
मार्किटिंग बोर्ड 62 बए 16
वन विभाग 80 31
मिड डे मील 40 13
बीएडं आर 96 09
बीएसएनएल 82 20
एलआईसी 17 12
हुडा विभाग 55 20
पर्यटन विभाग 26 25
सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ रोडवेज ने चक्का जाम किया है। अगर सरकार अब भी नहीं जागती है तो आगामी आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी, कर्मचारियों का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कर्मबीर चाहार, डिपो प्रधान।
कर्मचारियों की हड़ताल सफल रही है। यह अभी सरकार को केवल चेतावनी मात्र है। अगर सरकार फिर भी कर्मचारियों के हितों की अनदेखी करती रही तो स्टेट बॉडी के साथ बातचीत कर आगामी आंदोलन की रूप रेखा तैयार की जाएगी।
जयपाल गुढ़ा, जिला प्रधान, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा।
हड़ताल के चलते झज्जर डिपो को करीब दस लाख का नुकसान हुआ है। सुबह दो बसें डिपो से रवाना हुई थी। एक बस चंडीगढ़ के लिए जोकि बहादुरगढ़ से वापस आ गई थी। जबकि दूसरी बस सेंट्रल स्कूल में बच्चों को छोड़ने के लिए गई थी। कुल 627 कर्मचारियों में से करीब 287 कर्मचारियों ने हड़ताल में हिस्सा लिया है।
बलवंत सिंह गोदारा, जीएम रोडवेज, झज्जर।