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पढ़ी-लिखी पंचायत ने सरकारी स्कूल को बनाया स्मार्ट

Sun, 09 Apr 2017 01:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर
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स्मार्ट स्कूल - फोटो : bureau
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दूसरे गांव से बच्चों को लाने के लिए स्कूल बस, टाई-बेल्ट और यूनिफॉर्म में स्कूल में प्रवेश करते बच्चे। सभी कक्षाओं और विद्यालय प्रांगण में लगे सीसीटीवी कैमरे। पीने के लिए आरओ का पानी। पढ़ाई और मिड डे मील के निरीक्षण के लिए बाकायदा अलग से ड्यूटी।
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खाली पदों पर सरपंच के इंतजाम द्वारा टीचर तैनात। ये नजारा किसी निजी स्कूल का नहीं, बल्कि जिले के गांव खुंगाई स्थित राजकीय हाई स्कूल का है। पढ़ी-लिखी पंचायत का असर इस स्कूल पर साफ दिखाई दे रहा है। गांव के सरपंच रामनिवास ने ग्रामीणों के सहयोग से एक साल में ही पूरे स्कूल की दिशा और दशा दोनों बदल दी है। पिछले वर्ष इस स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या 50 का आकंड़ा भी नहीं छू पाई थी। अब विद्यार्थियों की संख्या 150 के पार हो गई है। अब पंचायत इस संख्या को 250 करने में जुटी हुई है।

दाखिलों के लिए डोट टू डोर कैंपेन
खुंगाई पंचायत के सदस्य इस समय गांव में पंचायत कर बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिला करवाने के लिए डोर टू डोर जा रहे हैं। पंचायत का यह अभियान केवल खुंगाई तक सीमित नहीं है बल्कि शेखूपुरा, बौडिया और बाजितपुर गांव में भी जारी है। इन गांवों से आने वाले बच्चों के लिए निशुल्क गाड़ी का प्रबंध सरपंच के द्वारा किया गया है। ग्राम पंचायत चाहती है कि उनका हाई स्कूल प्रदेशभर के लिए एक नजीर बने।
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स्कूल में हैं ये सुविधाएं
स्कूल की सभी कक्षाओं और विद्यालय प्रांगण में 18 कैमरे लगे हैं ताकि पढ़ाई, मिड डे मील सहित सभी क्रियाकलापों पर नजर रखी जा सके। कंप्यूटर लैब्स, साइंस लैब्स, खेल मैदान सभी जगह कैमरे लगे हुए हैं। गांव में बिजली की समस्या बहुत रहती है। बिजली के कारण पढ़ाई बाधित न हो। इसके लिए सरपंच द्वारा स्कूल में इन्वर्टर और बैट्रियां लगाई गई हैं जिससे न केवल पंखे सुचारू रूप से चलते हैं, बल्कि कंप्यूटर लैब भी इन्हीं इन्वर्टर के सहारे चल रही है। क्योंकि गांव में लाइट स्कूल की छुट्टी के समय ही आती है।

सक्षम योजना से मिले दो टीचर
प्रदेश सरकार के द्वारा चलाई जा रही सक्षम योजना के तहत पंचायत ने प्राइमरी विंग के लिए दो टीचरों की मांग की थी जिसके तहत गांव के ही दो युवाओं को सक्षम योजना के अंतर्गत प्राइमरी विंग में पढ़ाने के लिए लगाया गया है। प्रतिमाह 100 घंटे पढ़ाने के लिए इन्हें विभाग की ओर से 9 हजार रुपये की राशि दी जाएगी।

निजी कोष से किया सारा खर्च
सरकारी स्कूल के हालात बदलने में जो खर्च आया है, उसके लिए ग्राम पंचायत को कोई सरकारी ग्रांट नहीं मिली। बल्कि सरपंच रामनिवास ने अपने निजी कोष से ही पूरा खर्च उठाया है। सरपंच रामनिवास का सपना है कि गांव के सरकारी स्कूल का दर्जा हाई स्कूल से वरिष्ठ माध्यमिक का करवाया जाए। इसके लिए वो लगातार विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने में प्रयासरत हैं।

निजी स्कूल वाले करने लगे एडमिशन फीस माफ
खुंगाई के सरकारी स्कूल में बदलाव के चर्चे अब निजी स्कूल संचालकों के कानों तक पहुंच गए हैं जिसके चलते आलम ये है कि इस गांव के बच्चों को अपने स्कूल में ले जाने के लिए निजी स्कूल संचालक एडमिशन फीस माफ करने का लालच देने लगे हैं। लेकिन वर्तमान में ग्राम पंचायत के प्रयासों के आगे उनके ये प्रयास फीके नजर आते हैं।

पंचायत सदस्य और सरपंच स्कूल को देते हैं अपनी तनख्वाह
सरंपच रामनिवास को मिलने वाली पूरी तनख्वाह हर महीने स्कूल के कोष में जाती है तो वहीं उनकी पंचायत के कुछ मेंबर भी अपनी तनख्वाह स्कूल में देते हैं। वहीं गांव के बुजुर्ग भी अब अपनी बुढ़ापा पेंशन का हिस्सा गांव के स्कूल कोष में जमा करवाने लगे हैं। वहीं सरपंच इस समय इस प्रयास में लगे हैं कि गांव का कोई बच्चा निजी स्कूल का रूख न करे।

शिक्षा के माध्यम से ही जीवन में ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने स्कूल का कायाकल्प करवाया है। स्कूल पर खर्च की गई राशि उन्होंने पंचायत फंड से न लेकर अपनी जेब से और ग्रामीणों से चंदा लेकर एकत्रित की है। उनका प्रयास यही है कि उनका स्कूल पूरे जिले में नंबर एक पर बने।
-रामनिवास, सरपंच, गांव खुंगाई।

ग्राम पंचायत के द्वारा सरकारी स्कूल का स्तर उठाने में अच्छी पहल की गई है। दूसरी पंचायतों के द्वारा भी इस तरह की पहल की जानी चाहिए ताकि गरीब अभिभावकों को अच्छी शिक्षा के लिए कहीं भटकना न पड़े। विभाग के द्वारा स्कूल की मदद के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
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-सतबीर सिवाच, जिला शिक्षा अधिकारी, झज्जर।
 
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