पहले सेटेलाइट और इसके बाद हुए फिजिकल सर्वे में शहर की पांच कॉलोनियों का भाग्य खुलने का रास्ता साफ हो गया है। ये पांचों कॉलोनियां अवैध हैं, लेकिन वैध होने के लिए सरकार की हिदायतों पर खरी उतरी हैं।
अगले 15 दिन में नगरपालिका इनको नियमित कॉलोनी का दर्जा दिलाने के लिए डीसी के माध्यम से सरकार को रिपोर्ट भेजेगी।
सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो हो सकता है, इन कॉलोनियों में रह रहे लोगों को नव वर्ष में वैध कॉलोनियों में रहने का तोहफा मिल जाए।
झज्जर शहर में वर्तमान में कुल 15 कॉलोनियां वैध हैं, इसके अलावा अन्य कॉलोनियां अवैध की श्रेणी में आती हैं। खास बात है कि जिला बनने के बाद पहली बार 15 जनवरी 2014 को वर्षों बाद इन 15 कॉलोनियों को वैध का दर्जा मिल सका था, लेकिन इनके साथ लगती करीब 10 और अवैध कॉलोनियों को अपने हाल पर छोड़ दिया।
हालांकि इनमें से कई कॉलोनियां वैधता के मापदंड भी पूरा कर रही थीं। तभी से यहां के लोग 'अवैध के डर के साये में जी रहे हैं। अब अवैध कॉलोनियों को लेकर नगरपालिका की ओर से जो सर्वे कराया गया है, उसमें पांच कॉलोनियां सरकार की उन हिदायतों को पूरा करती पाई गई हैं, जिससे इनको वैध का दर्जा मिले।
ये हैं पांच कॉलोनियां
इनमें नेहरू कॉलोनी, ऑफिसर कॉलोनी, छोटूराम कॉलोनी, अमर कॉलोनी और धांधू कॉलोनी शामिल हैं। इनको लेकर पहले जीआईएस कंपनी की ओर से सेटेलाइट सर्वे कराया गया।
इनमें कॉलोनी का 60 प्रतिशत हिस्सा कवर्ड मिला है। इसके बाद फिजिकल सर्वे किया गया। अब फाइनल सर्वे जिसमें जमीन के सजरे आदि का मिलान हो रहा है, भी अंतिम चरण मे है। नगरपालिका अगले 15 दिन में कॉलेेनियों को वैध करने की मांग को लेकर केस शहरी निकाय विभाग को भेजने की तैयारी में है।
पूरी प्रक्रिया डीसी के माध्यम से होगी। इसके बाद सरकार की ओर से एक कमेटी का गठन कर यहां के हालातों का जायजा लेकर सरकार को रिपोर्ट की जाएगी। इससे पहले जिला नगर योजनाकार की ओर से कॉलोनियों को वेरिफाई करने का काम होगा।
गांव से भी पिछड़ी हैं कॉलोनी
अब निकाय विभाग ने सर्वे के निर्देश दिए हैं तो यहां के लोगों को विकास की उम्मीद भी बंधी है। फिलहाल शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बसी ये अवैध कॉलोनियां विकास के मामले में काफी पिछड़ी हुई हैं।
हालात गांवों जैसे हैं। घरों का पानी नाली या सीवरेज की बजाय गलियों में सड़क पर बह रहा है। अधिकतर गलियां कच्ची पड़ी हैं। अन्य मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं।
वैध हुई तो यह होगा लाभ
-इनमें रहने वाले हजारों परिवारों को बुुनियादी सुविधाएं मिल सकेंगी।
-सांसद/विधायक विकास के लिए अपनी निधि से ग्रांट दे सकेंगे।
-प्रशासन बिजली, पानी आदि व्यवस्थाओं का प्रबंध करेगा।
-नगरपालिका को मिलनी वाली ग्रांट से गलियां पक्की हो सकेंगी।
-लोगों के मन से अवैध कॉलोनी में रहने का डर दूर होगा।