झज्जर। रविवार देर रात जब एक साथ चार चिताओं से लपटें उठीं तो वहां खड़ा हर कोई फफक पड़ा। मृतकों की एक साथ अंतिम यात्रा से लेकर शमशान तक साथ चलने वालों की आंखें नम थीं। पति की अंतिम विदाई में पत्नियां फूट-फूटकर रो रही थीं। बार-बार उठकर जमीन पर गिर जा रहीं थीं। गांव की महिलाएं उन्हें संभालने की कोशिश कर रही थीं। हर किसी की सिसकियां सुनाई दे रहीं थीं।
गांव में हादसे के बाद लोगों लोग पूरे दिन बाहर बैठे रहे। गलियां सूनी पड़ीं दिखाई दीं। ग्रामीण मंदिर परिसर में एकत्रित होकर पूरे दिन पंचायत के फैसले का इंतजार करते दिखे।
गांव में नहीं जला चूल्हा
हादसे के बाद गांव में किसी के घर पर चूल्हा नहीं जला। लोग शोक में बैठे रहे। पंचायत और प्रशासन के फैसले पर सबकी निगाहें टिकीं थीं। बच्चे भी खेलने के लिए बाहर नहीं निकले।
मोनू और दलबीर इकलौते थे कमाने वाले
पंचायत में भी परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था। मृतक नरेंद्र अपने पीछे पत्नी, एक बेटा, एक बेटी छोड़ गया है। मुनीमपुर निवासी दलबीर पत्नी, एक बेटा, तीन बेटियां, मुनीमपुर निवासी मोनू, पत्नी, एक बेटा, एक बेटी और उत्तर प्रदेश के पीलीभीत निवासी रम्मे अपने पीछे पत्नी, दो बेटे, पांच बेटियां छोड़ गया है। मोनू और दलबीर के परिवार में इकलौते कमाने वाले थे। उनकी मौत के बाद परिवार का बुरा हाल है।
छह माह के बेटे के सिर से उठा पिता का साया
हादसे में जान गंवाने वाले दलबीर का छह माह का बेटा है। साथ ही वह परिवार में इकलौते कमाने वाले थे। उनके तीन बेटियां हैं। दलबीर की पत्नी बेटे को गोद में लेकर बार-बार बेसुध हो जा रही हैं। वहीं मोनू के पास एक बेटा और एक बेटी हैं। उनकी पत्नी भी बार-बार बेहोश हो रही है।
फोटो 75: नरेंद्र, मुनीमपुर
फोटो 75: नरेंद्र, मुनीमपुर
फोटो 75: नरेंद्र, मुनीमपुर
फोटो 75: नरेंद्र, मुनीमपुर