21jjrp09- झज्जर। आंगनबाड़ी में खेलते बच्चे। स्त्रोत- विभाग
झज्जर। सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद राज्य सरकार ने प्रदूषण के चलते पहली से बारहवीं तक के सरकारी व निजी स्कूलों की छुट्टियों कर दी, लेकिन आंगनबाड़ी केंद्र में आने वाले 3 से 6 साल तक के बच्चों की छुट्टी अब तक नहीं हुई है। प्रशासनिक अधिकारियों को अभी आदेशों का इंतजार है।
छोटे-छोटे बच्चे प्रतिदिन ठंड और प्रदूषण में आंगनबाड़ी केंद्रों में जा रहे हैं। जिले में लगभग 1130 आंगनबाड़ी सेंटर हैं, जहां पर 64 हजार से अधिक नौनिहाल रजिस्टर्ड हैं। इसमें 0 से 6 माह के 3131, 6 माह से 3 साल तक के 26376 और तीन से 6 साल तक के 34759 बच्चे रजिस्टर्ड किए गए हैं। इनमें लगभग तीन से छह साल के बच्चे आंगनबाड़ी में प्रतिदिन जा रहे हैं। इन बच्चों की अब तक छुट्टियां नहीं की गई हैं। ऐसे में बच्चों को ठंड और प्रदूषण के बीच प्रतिदिन आंगनबाड़ी केंद्रों में आना पड़ता है।
आंगनबाड़ी केंद्रों में ज्यादातार जरूरतमंद परिवारों के बच्चे ही आते हैं। यहां आने पर बच्चों को खाना भी दिया जाता है, लेकिन जिले में वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 से अधिक दर्ज किया जा चुका है और ठंड भी अब बढ़ने लगी है। ऐसे में सरकार ने पहली से बारहवीं तक सरकारी व निजी स्कूलों की छुट्टियां कर दी है, लेकिन आंगनबाड़ी केंद्रों की अब तक छुट्टी नहीं की है। ऐसे में ठंड व प्रदूषण के बीच यह बच्चे प्रतिदिन केंद्रों पर जा रहे हैं। यह बच्चे सुबह 9 बजे जाते हैं और दोपहर ढाई बजे घर लौटते हैं। इन बच्चों पर भी प्रदूषण का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। प्रदूषण के कारण बच्चों को खांसी, जुकाम, एलर्जी व सांस रोग होने का खतरा बना रहता है।
मुख्यालय की तरफ से आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की छुट्टी के आदेश नहीं आए हैं। यदि आते हैं तो छुट्टी कर दी जाएगी।
उर्मिल सिवाच, परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, झज्जर