हाईकोर्ट की गाइडलाइंस के तहत बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य बीके गोयल की अगुवाई में ट्रैफिक पुलिस की टीम ने 50 से अधिक स्कूल बसों की चेकिंग की। इनमें 33 बसों में नियमों की कमी पाई गई। उनका मौके पर ही चालान काटा गया। यह चेकिंग स्कूल बसों में आने-जाने वाले बच्चों की सेफ्टी को लेकर की गई। इस चेकिंग अभियान के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात ये सामने आई कि केवल दो बसों में महिला परिचालक मिली। आयोग ने दो स्कूल प्रबंधकों को मौके पर ही बुलाकर उनसे शपथपत्र लिए गए कि वे एक महीने के भीतर बसों में महिला परिचालक तैनात कर देंगे।
सीबीएसई ने किया सर्कुलर जारी
दरअसल सीबीएसई ने 23 फरवरी को एक सर्कुलर जारी कर स्कूल प्रबंधकों को गाइड लाइन जारी की थी। ताजा गाइडलाइंस के मुताबिक अगर स्कूल बस द्वारा कोई वायलेंस किया जाता है इसकी जिम्मेदारी संस्थान प्रमुख की होगी। वहीं हाईकोर्ट ने भी स्कूल बसों में नियम कायदों को सख्ती से लागू करवाने के लिए राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को निगरानी के निर्देश दिए थे।
कौन-कौन रहे चेकिंग अभियान में शामिल
स्कूल बसों की चेकिंग अभियान के दौरान डीईओ सतबीर सिवाच, बीईओ मदन चोपड़ा, जिला बाल अधिकार संरक्षण अधिकारी लतिका दहिया, ट्रैफिक एसएचओ संदीप कुमार, ट्रैफिक को-आर्डिनेटर सतीश कुमार के अलावा ट्रैफिक पुलिस कर्मचारी मौजूद रहे।
क्या कहते हैं बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य
बच्चों की सेफ्टी के प्रति हाईकोर्ट के सख्त निर्देश है कि गाइडलाइंस को फॉलो न करने वाली स्कूल बसों के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाए। 15 मार्च तक सभी स्कूल बसों की जांच कर सेफ्टी से संबंधित सभी 22 बिंदुओं को सुनिश्चित किया जाएगा। स्कूल प्रबंधन द्वारा नियमों को अनदेखा करना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।