झज्जर। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा और सीटू की तरफ से मांगों को लेकर उपायुक्त कार्यालय का मंगलवार को घेराव करने के साथ-साथ शहर में प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठन नेताओं ने बताया कि कर्मचारियों की मांगों, जनसेवा के महकमों का निजीकरण तथा पूंजीपतियों को मुनाफा पहुंचाने वाली नव उदारीकरण की नीतियों के खिलाफ लगातार संघर्ष करता आया है। पूरे देश की प्राकृतिक संसाधनों को पूंजीपतियों के हवाले कर रही है। यहां तक की देश की रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाले कृषि क्षेत्र को भी तहस नहस करने के लिए तीन काले कृषि कानून लागू पर तुली हुई है। कृषि कानून अकेले किसान को नही बल्कि समाज के बड़े भाग को प्रभावित करेंगे। यह बात सर्वकर्मचारी संघ के प्रधान रामबीर ने कही। सर्व कर्मचारी संघ के फैसले के अनुसार मंगलवार को झज्जर में उपायुक्त कार्यालय का घेराव किया गया। इसकी अध्यक्षता संयुक्त रूप से एसकेएस जिला प्रधान रामबीर, सीटु प्रधान सरोज दुजाना और रिटायर्ड कर्मचारी संघ प्रधान रामेश्वर बिरधाना ने की। मंच संचालन विष्णु जांगड़ा और किरण ने किया।
घेराव के बाद एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मुख्य मांगें नौकरी से निकाले सभी विभागों के सभी कर्मचारी वापस लिए जाएं, ठेकाप्रथा समाप्त कर सभी प्रकार के कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए, समान काम समान वेतन नियम लागू किया जाए, पुरानी पेंशन बहाल की जाए, लेबर कोड, कृषि कानून, राष्ट्रीय शिक्षा नीति व बिजली संशोधन बिल रद्द किए जाएं। पदोन्नति वरिष्ठता आधारित हो, डीए पर लगाई रोक हटे, प्रीमच्योर सेवानिवृत्त आदेश वापिस हों, सभी विभागों में वर्कलोड के अनुसार पदों का सृजन कर नियमित भर्ती हो, जनसेवा के क्षेत्रों के निजीकरण पर रोक लगे शामिल हैं।
प्रदर्शन को राज्य कमेटी सचिव बिजेंद्र बेनीवाल, किसान सभा से रामचंद्र यादव, अध्यापक संघ से रमेश जाखड़, राज्य कमेटी सदस्य जयपाल गुढ़ा, अपलातुन जाखड़, आशा वर्कर यूनियन राज्य प्रधान प्रवेश मातनहेल, एमपीएचडब्ल्यू संघ राज्य प्रधान ओमपति कादियान, बिजली विभाग से सर्किल सचिव देवेंद्र पूनिया, वरिष्ठ नेता बंसीलाल, बिजेंद्र सैनी, सेवानिवृत्त कर्मचारी नेता राजेंद्र जुलाना, बलबीर सिंह कोट तथा शारीरिक शिक्षक संघ के राज्य प्रधान सतबीर देशवाल ने संबोधित किया।
प्रदर्शन में नगरपालिका संघ झज्जर, बिजली विभाग, जन स्वास्थ्य, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, आशा वर्कर, मिड डे-मील वर्कर, रिटायर्ड कर्मचारी संघ, बर्खास्त पीटीआई, किसान सभा, भवन निर्माण मजदूर संगठन और सर्व कर्मचारी संघ से जुड़े सभी संगठनों के कर्मचारियों ने भाग लिया। प्रदर्शन के बाद फैसला लिया गया कि कर्मचारी 18 जनवरी तथा 20 जनवरी को टीकरी और ढांसा बॉर्डर पर किसानों का समर्थन करेंगे और सरकार मांग नही मानती है तो आंदोलन को तेज करेंगे।