फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लोहारी गांव के सरपंच को उपायुक्त ने किया निलंबित

विज्ञापन
विज्ञापन
झज्जर। लोहारी गांव के सरपंच को उपायुक्त ने निलंबित कर दिया है। मंगलवार को उपायुक्त की ओर से सरपंच के निलंबित करने के आदेश जारी करने के साथ मामले की जांच अतिरिक्त उपायुक्त को सौंपी है। उपायुक्त ने जारी आदेश में कहा है कि लोहारी गांव के सरपंच तरुण कुमार ग्राम पंचायत लोहारी के विरुद्ध नियमित जांच के आदेश जारी किए जा चुके हैं। अतिरिक्त उपायुक्त को नियमित जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। तरुण कुमार सरपंच ग्राम पंचायत लोहारी पर लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। आदेशों में कहा गया है कि हरियाणा पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 51(1) के अंतर्गत निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए तरुण कुमार को सरपंच पद से निलंबित किया जाता है। उनको आदेश दिए गए हैं कि वह पंचायत की चल अचल संपत्ति जो भी उनके नियंत्रण में है उसे तुरंत बहुमत रखने वाले पंच को हरियाणा पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा में दिए गए प्रावधान के अनुसार सौंप दिया जाए। इस संबंध में गांव के ही धर्मेंद्र कुमार ने डीसी व अन्य अधिकारियों के साथ-साथ सीएम विंडो पर भी की थी। जबकि वह मामला दर्ज होने के बाद भी वर्ष 2016 में सरपंच पद पर चुनाव जीता था।
विज्ञापन

- मध्य प्रदेश पुलिस 26 जनवरी को कर चुकी है गिरफ्तार
वर्ष 2009 व 2010 में मध्यप्रदेश में हुए हजारों एकड़ जमीन के फर्जीवाड़े के मामले में मध्य प्रदेश पुलिस ने झज्जर जिले के लोहारी गांव के सरपंच को 26 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया था। सरपंच को गणतंत्र दिवस समारोह संपन्न होने के बाद समारोह स्थल के नजदीक से ही मध्य प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार किया था। मध्य प्रदेश के शहडोल कोतवाली से झज्जर पहुंची पुलिस टीम का नेतृत्व जांच अधिकारी राकेश बागडी कर रहे थे। गांव के कुछ लोगों ने चुनाव के समय भी इस बारे में जिला प्रशासन के अधिकारियों को इस मामले की शिकायत की थी। पिछले साल जून में उपायुक्त ने भी शहडोल मध्यप्रदेश के एसपी से इस बारे में पत्र भेज कर जानकारी मांगी थी। मध्य प्रदेश के शहडोल कोतवाली के जांच अधिकारी राकेश बागड़ी का कहना है कि वर्ष 2009 व 10 में लोहारी गांव निवासी तरुण कुमार शर्मा के खिलाफ तीन मामले दर्ज किए गए थे। जिनमें वह फरार चल रहा था। उनका कहना है कि वर्ष 2009 व 10 में दर्ज हुए तीनों मामलों में जमीन का फर्जीवाड़ा किया गया है। उन्होंने बताया कि आरोपी सहित कुछ लोगों ने मिलकर गुरुग्राम में बीटीके नाम की एक फर्म का गठन किया हुआ था। इसके माध्यम से एपीसीएल कंपनी के साथ एमओयू किया हुआ था। इसके तहत इन लोगों ने कंपनी को जमीन उपलब्ध करानी थी। मामले में आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज हुआ तो वह मध्य प्रदेश से अपने क्षेत्र में आ गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें