आंदोलनकारी किसानों के टीकरी बॉर्डर पड़ाव में काफी समय से अनेक टेंट खाली नजर आ रहे हैं। अनेक टेंटों पर ताले लगे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का एलान भी कर दिया है लेकिन अपनी बाकी मांगें पूरी होने तक किसान बॉर्डर से घर लौटने के लिए तैयार नहीं है। आंदोलन को तेज करने के लिए किसान नेता संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से खाली टेंटों/झोपड़ियों को भरने के लिए किसान संगठनों की ड्यूटियां लगाई जा रही हैं ताकि एक साल पूरा होने के मौके पर 26 नवंबर को यहां आंदोलन की ताकत दिखाई जा सके।
भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के महासचिव परगट सिंह ने बताया कि किसान 26 नवंबर को आंदोलन की जीत का जश्न मनाएंगे और जो झोपड़ियां खाली पड़ी हैं वे एक बार फिर भर जाएंगी। हरियाणा और पंजाब से इतने किसान आएंगे कि उनके रहने के लिए जगह कम पड़ जाएगी। परगट सिंह ने सरकार से संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा प्रधानमंत्री को लिखी गई चिट्ठी की सभी छह मांगों को पूरी करने की पुरजोर वकालत की। उन्होंने कहा कि कानून तो रद्द होंगे ही, साथ ही एमएसपी और अन्य मांगों को लेकर भी बातचीत शुरू होनी चाहिए। परगट सिंह ने बताया कि 29 नवंबर को संसद के लिए प्रस्तावित ट्रैक्टर मार्च पर फैसला लेने के लिए भी 27 नवंबर को संयुक्त मोर्चा एक बार फिर करेगा। इसी बैठक में निर्णय लिया जाएगा कि 29 नवंबर को दिल्ली के लिए ट्रैक्टर मार्च होगा या नहीं।