किसान आंदोलन में पहुंची सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर। संवाद
- फोटो : Bahadurgarh
नए कृषि कानूनों से तबाह हो जाएगी राशन व्यवस्था : मेधा पाटकर
सामाजिक कार्यकर्ता पाटकर पहुंची टीकरी बॉर्डर
महिला दिवस पर आंदोलनकारियों को किया संबोधित
संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरगढ़। सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर सोमवार को टीकरी बॉर्डर पहुंचीं। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कृषि कानूनों को आम आदमी के खिलाफ बताते हुए कहा कि नए कानूनों से राशन व्यवस्था तबाह हो जाएगी। इसलिए किसान आंदोलन को अंजाम तक पहुंचाना बहुत जरूरी है।
उन्होंने कहा कि खेती-किसानी की रक्षा के लिए चल रहे इस संघर्ष में महिलाओं को कम करके नहीं आंक सकते। उनके सहयोग से ही संघर्ष और मजबूत हो रहा है। महिलाएं खेतीबाड़ी में पूरा सहयोग करती हैं। महिलाएं केवल कहने को ही आधी आबादी नहीं, बल्कि हर काम में सहभागी हैं। महिलाओं के बिना हर बदलाव अधूरा है। खेत-खलिहान के साथ सबसे मजबूत रिश्ता महिलाओं का है। देश और समाज की चर्चा में महिलाओं का आंदोलन में योगदान है। युवा वर्ग से उन्होंने किसान आंदोलन से जुड़ने की अपील की।
उन्होंने कहा कि तीनों कृषि कानून चंद पूंजीपतियों के पोषण के लिए लाए गए हैं। ये कानून लागू किए गए तो राशन व्यवस्था तबाह हो जाएगी। मजदूरों और आम किसानों के लिए घर की रसोई को चलाना असंभव हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ये तीनों कानून वापस नहीं हुए तो सबसे अधिक नुकसान किसान मजदूरों का होगा। किसान आंदोलन को विदेशी फंडिंग के आरोपों को मेधा पाटकर ने गलत बताया। उन्होंने कहा कि पैसा और दूसरे जरूरी संसाधन कोई चीन या पाकिस्तान से नहीं आ रहे, बल्कि लंगर परंपरा से आ रहे हैं। पंजाब के लोगों में शहादत की परंपरा रही है। इसलिए पीछे हटने का सवाल ही पैदा नहीं होता। कानून वापस होने और एमएसपी मिलने पर ही आंदोलन खत्म होगा।
-फोटो 9 : मेधा पाटकर, सामाजिक कार्यकर्ता