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पंजाब के किसानों ने मंदिर में किया शबद-कीर्तन

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बहादुरगढ़। दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षक गांव लोवा माजरा के निवासी कृष्ण जून ने कहा कि हरियाणा और पंजाब एक मां की दो संतानें हैं। दोनों जगह के लोग मेहनतकश और स्वाभिमानी हैं। धरती से प्यार इनके खून में है। इसीलिए खेती हो या सेना में जाकर धरती मां के लिए शहादत.. हरियाणा और पंजाब का कोई सानी नहीं है। दोनों जगह के लोग मेहनतकश और अपनी जड़ों से बेहद लगाव रखने वाले हैं। अविभाजित पंजाब में दोनों संस्कृतियां एक होकर सदियों एक-दूजे के साथ भाईचारे से बसती रही हैं। आज वही भाईचारा टीकरी बॉर्डर पर दिख रहा है।
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शुक्रवार को लोवा, माजरा व देशलपुर गांव की ओर से आयोजित भंडारे में पंजाब से किसान आंदोलन में आए किसानों ने शिरकत की। गांव के लोगों ने दिल खोलकर पंजाब के किसान भाइयों का सम्मान किया। इस मौके पंजाब के किसानों ने मंदिर में शबद कीर्तन किया व गुरबाणी सुनाई। हरियाणा के किसानों ने पंजाब के किसानों के लिए प्रेम से भंडारा करवाया।
कृष्ण जून ने कहा कि किसान आंदोलन पंजाब और हरियाणा के लिए सांस्कृतिक भाईचारे को दोबारा स्थापित कर रहा है। लोवा माजरा और देशलपुर के लोगों ने कृछ दिन पहले सैकड़ों ट्रैक्टरों के साथ आंदोलन में बैठे किसानों को अपना समर्थन दिया था। पंजाब से आए किसान नछत्तर सिंह ने कहा कि हम इन बातों को शब्दों में बयां नहीं कर सकते पर हरियाणा वाले भाइयों ने हमें जो आदर-मान और सहयोग दिया है, वे काबिले तारीफ है।
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उन्होंने कहा कि हरियाणा पंजाब का भाईचारा सबसे न्यारा है। कृष्ण जून ने कहा कि सियासत ने पंजाब और हरियाणा में जो दूरियां बना दी थी किसान आंदोलन के चलते वो सब धूमिल हो रही हैं और भविष्य में हम बेहतर की उम्मीद कर सकते हैं। शुक्रवार को ग्रामीणों के भंडारे में तीनों गांवों के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इनमें से मनजीत प्रधान, बबलू जून, राजेश जून, पंडित संजय, बिट्टू जून, रामसिंह, काला, संदीप जून, सूरज, मनोज, पंडित सुभाष, कुलदीप जून व बल्लूू प्रधान इत्यादि प्रमुख हैं।
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