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सैनिकों के बलिदान पर गर्व, उनकी शहादत भुलाया नहीं जा सकता : पूर्व सैनिक

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25jjrp08- अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में मौजूद पूर्व सैनिक। संवाद
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झज्जर। इंडियन वेटरन एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह ने कहा कि कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय जवानों ने विषम परिस्थितियों में भी अपना मनोबल नहीं टूटने दिया और दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
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युद्ध के दौरान 530 सैनिक शहीद हुए थे जिनमें प्रदेश के सबसे अधिक 11 सैनिक झज्जर जिले के थे। हमें देश पर शहीद हुए सभी सैनिकों पर गर्व है। उनकी शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

वह शनिवार को कारगिल दिवस की पूर्व संध्या पर अमर उजाला की ओर से कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में पूर्व सैनिकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज भी पूर्व सैनिकों की कई समस्याएं वर्षों से लंबित हैं।
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इन मांगों को लंबे समय से उठाया जा रहा है, लेकिन अब तक इनका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। खासतौर पर पूर्व सैनिकों को हर कार्य के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाना पड़ता है।
चाहे इलाज की बात हो, कैंटीन से सामान लेने की या सैनिक बोर्ड में काम के लिए जाने की। सभी कार्यालय अलग-अलग स्थानों पर बने हुए हैं। सभी कार्यालयों के लिए बस अड्डे के पास दो एकड़ जमीन आवंटित की गई थी, लेकिन आज तक वहां निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। इससे पूर्व सैनिकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

रुडियावास निवासी कैप्टन सत्यवीर सिंह कादियान ने बताया कि वह स्वयं कारगिल युद्ध में शामिल थे और उनकी ड्यूटी वहीं पर थी। उस समय दोनों तरफ से भीषण युद्ध हुआ।
अंत में भारत की जीत हुई और भारतीय सेना ने सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर कब्जा कर लिया था। हवलदार हजारी लाल और डावला निवासी धर्मवीर सिंह ने कहा कि शहीद सैनिकों का जितना सम्मान किया जाए, उतना कम है।
आज भी जिले के युवाओं में सेना में जाने का जज्बा सबसे अधिक है। कैप्टन कृष्ण चंद्र और नायक क्लर्क बिजेंद्र सिंह ने कहा कि भारत-पाकिस्तान या भारत-चीन युद्धों में हमारे जवानों की वीर गाथाएं देखने को मिलती हैं।

नायक राय सिंह यादव और रिसालदार अब्दुल जब्बार ने कहा कि सैनिक अपने परिवारों को छोड़कर सीमा पर जाकर देश की रक्षा करते हैं। वे अपने परिवार से पहले देश को रखते हैं इसलिए सभी सैनिक सम्मान के पात्र हैं।
जिला पैटर्न राजकिशन हरित ने कहा कि पूर्व सैनिकों की कई मांगें लंबित हैं। आज तक रेस्ट हाउस का निर्माण नहीं हो सका। जर्जर होने के बाद भी उसे दोबारा नहीं बनाया गया। जिला सैनिक बोर्ड का कार्यालय भी म्यूजियम में चल रहा है। इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।

वीर नारी सुमित्रा, पूर्व सैनिक प्रकाश सिंह और महेंद्र सिंह ने कहा कि पूर्व सैनिकों के अस्पताल में पूरी दवाएं उपलब्ध नहीं हो पातीं। खासतौर पर महंगी दवाओं के लिए पूर्व सैनिकों को बाहर से खरीदारी करनी पड़ती है।

कैप्टन उमराव सिंह, सूबेदार मेजर बिजेंद्र सिंह और नायक भूप सिंह ने बताया कि आधार कार्ड में गलती होने पर वीरांगनाओं को उसे ठीक करवाने के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं और मुख्यालय तक जाना पड़ता है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर किसी अधिकारी की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए।

25jjrp08- अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में मौजूद पूर्व सैनिक। संवाद

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