झज्जर। शहर के प्रतिष्ठित राजकीय स्नातकोत्तर नेहरू महाविद्यालय में एक मई से प्राचार्य का पद खाली पड़ा है। पिछले दिनों प्रदेश में 40 प्राचार्यों की प्रमोशन सूची जारी होने के बाद भी नेहरू कॉलेज को प्राचार्य नहीं मिला। इससे कॉलेज के स्टाफ का वेतन अटक गया है। फिलहाल राजकीय नेहरू स्नातकोत्तर महाविद्यालय में करीब 2500 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
झज्जर जिले के दूबलधन, दुजाना और बादली स्थित कॉलेजों में नए प्राचार्य नियुक्त किए गए हैं जबकि जिला मुख्यालय के सबसे बड़े और सबसे पुराने राजकीय स्नातकोत्तर नेहरू महाविद्यालय में कोई प्राचार्य नहीं है। इस कॉलेज में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के 13 पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। यहां प्राचार्य का पद सावित्री ढिल्लो की सेवा निवृत्ति के बाद एक मई से रिक्त पड़ा है। प्राचार्य ना होने के कारण महत्त्वपूर्ण प्रशासनिक और वित्तीय कार्य लंबित पड़े हैं। इसके अलावा शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक स्टाफ को मिलाकर 100 से अधिक कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पा रहा है। वरिष्ठ प्राध्यापकों की देखरेख में केवल सामान्य कार्य ही हो पा रहे हैं। कुछ स्टाफ सदस्यों ने बताया कि वेतन न मिलने के कारण उन्हें आर्थिक तौर पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
तीन कॉलेजों के एक प्राचार्य
उधर राजकीय महाविद्यालय, बिरोहड़ और राजकीय महाविद्यालय, बहू में भी कोई नियमित प्राचार्य नहीं है। राजकीय महाविद्यालय, मातनहेल के प्राचार्य डॉ रणवीर आर्य के पास इन दोनों कॉलेजों का प्रभार है। इसी तरह राजकीय महाविद्यालय, छारा के प्राचार्य अशोक वर्मा के पास पहले चार कॉलेजों का प्रभार था। वे छारा के अलावा दुजाना, दूबलधन और गुरुग्राम के जटौली हेलीमंडी के प्राचार्य रहे। अब दुजाना में डॉ तराना को तथा दूबलधन में डॉ अनिता को प्राचार्य बनाया गया है जबकि बादली में अनुपमा यादव नई प्राचार्य होंगी।