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आपात्कालीन स्थिति के लिए तैयार, सहायता ज्ञान प्राप्त करें और जीवन बचाएं : कंचन कुमार

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-फोटो 57 : कार्यक्रम का शुभारंभ करती प्राचार्य डॉ. आशा शर्मा व फर्स्ट एड ट्रेनर कंचन कुमार। स्र
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बहादुरगढ़। वैश्य आर्य शिक्षण महिला महाविद्यालय की एनएसएस व वाईआरसी स्वयंसेविकाओं को बेसिक फर्स्ट एड ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग देने के लिए जिला रेड क्रॉस सोसाइटी, झज्जर से फर्स्ट एड ट्रेनर कंचन कुमार पहुंचे। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती व सर जीन हेनरी डुनेंट की प्रतिमा के सामने द्वीप प्रज्ज्वलित कर की गई।
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ट्रेनर कंचन कुमार ने बताया कि प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध साधनों में किया गया सरल उपचार है। हम प्राथमिक चिकित्सा का उपयोग हड्डी टूट जाने पर, जलने पर, हार्टअटैक, श्वसन-मार्ग में किसी प्रकार का अवरोध आ जाना, पानी में डूबना, लू, मधुमेह के रोगी का बेहोश होना, हड्डी के जोड़ों का विस्थापन, विष का प्रभाव, दांत दर्द, घाव-चोट आदि में कर सकते है।
उन्होंने स्वयंसेविकाओं को सीपीआर ट्रेनिंग भी दी और बताया कि जब किसी पीड़ित को सांस लेने में दिक्कत हो या फिर वो सांस न ले पा रहा हो और बेहोश जो जाए तो सीपीआर से उसकी जान बचाई जा सकती है। बिजली का झटका लगने पर, पानी में डूबने पर और दम घुटने पर सीपीआर से पीड़ित को आराम पहुंचाया जा सकता है। दिल का दौरा पड़ने पर तो सबसे पहले और समय पर सीपीआर दे दिया जाए तो पीड़ित की जान बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
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महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. आशा शर्मा ने कहा कि प्राथमिक चिकित्सा विद्या प्रयोगात्मक चिकित्सा के मूल सिद्धांतों पर निर्भर है। इसका ज्ञान शिक्षित पुरुषों को इस योग्य बनाता है कि वे आकस्मिक दुर्घटना या बीमारी के अवसर पर, चिकित्सक के आने तक या रोगी को सुरक्षित स्थान पर ले जाने तक, उसके जीवन को बचाने, रोगनिवृत्ति में सहायक होने, या घाव की दशा और अधिक निकृष्ट होने से रोकने में उपयुक्त सहायता कर सकें।
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-फोटो 57 : कार्यक्रम का शुभारंभ करती प्राचार्य डॉ. आशा शर्मा व फर्स्ट एड ट्रेनर कंचन कुमार। स्रोत : कॉलेज



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