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पुलिस को मिला दुष्कर्म पीड़िता का फोन

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बहादुरगढ़। पश्चिम बंगाल की किसान आंदोलनकारी युवती से पिछले महीने टीकरी बॉर्डर के पास सामूहिक दुष्कर्म मामले की जांच एसआईटी तेजी से कर रही है। युवती का मोबाइल वीरवार को पुलिस को मिल गया। पुलिस का कहना है कि इस मोबाइल से केस की जांच में बहुत मदद मिलेगी। केस में आरोपी एक महिला और दो वकीलों से भी एसआईटी ने पूछताछ की।
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पश्चिम बंगाल निवासी युवती का मोबाइल आंदोलनकारी कार्यकर्ता कुलबीर ने वीरवार को बहादुरगढ़ के डीएसपी पवन कुमार के नेतृत्व वाली एसआईटी को सौंप दिया। कुलबीर ने बताया कि 11 मई को पुलिस की मौजूदगी में पीड़िता का मोबाइल उसके पिता ने मुझे सौंप दिया था और कहा था कि केस से अलग पर्सनल डाटा को सुरक्षित कापी कर यह फोन पुलिस को दे दिया जाय। इसलिए पीड़ित पिता को देने के लिए व्यक्तिगत डाटा उन्होंने कॉपी कर लिया है।
डीएसपी पवन कुमार ने बताया कि मोबाइल से हुई व्हाट्सएप चैटिंग और कॉल डिटेल आदि से मामले की जांच में बहुत मदद मिलेगी। मोबाइल की फॉरेंसिक जांच करवाई जाएगी। कुछ डाटा कापी किए जाने या डिलीट किए जाने की जानकारी फॉरेंसिक जांच से ही सामने आएगी। मोबाइल से अगर कुछ डाटा डिलीट भी किया होगा तो वह रिकवर हो जाएगा। रिकवर नहीं भी हुआ तो संबंधित लोगों को सुबूत मिटाने के आरोप में केस में शामिल किया जा सकता है। पुलिस को मोबाइल देरी से मिलने के सवाल पर डीएसपी ने कहा कि पीड़ित पिता अपने गृह राज्य पश्चिम बंगाल चले गए हैं।
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एसआईटी ने वीरवार को महिला थाना बहादुरगढ़ में तीन लोगों से पूछताछ की। आरोपी कविता और दो वकीलों से पूछताछ की गई। वीरवार को कविता से कई सवाल पूछे गए। डीएसपी ने बताया कि योगिता व कविता दोनों आरोपी यह मान चुकी हैं कि उन्हें पीड़ित युवती ने बता दिया था कि उसके साथ गलत हरकत हुई है। उन्हें और आंदोलन से जुड़े कई लोगों को इस बारे में 18 अप्रैल से पहले भी पता था। इसीलिए किसानों ने गुस्से में आकर आरोपियों के टेंट को तोड़ दिया था। आगे भी लोगों से पूछताछ हो सकती है।
उन्होंने कहा कि यह साबित हो चुका है कि जिन दो आरोपियों से पूछताछ हुई है, उनको मामले के तथ्यों के बारे पहले से ही सीधे तौर पर जानकारी थी। लेकिन इसकी जांच की जा रही है कि इनकी दुष्कर्म या छेड़खानी में कैसी और कितनी संलिप्तता थी।
डीएसपी पवन कुमार ने बताया कि पीड़ित पिता ने जिसका जैसा रोल है, उसके हिसाब से छहों लोगों के खिलाफ शिकायत दी थी। किसी ने वीडियो बनाया, इसके अलावा किसी ने तथ्यों को छिपाया। इधर, किसान नेता योगेंद्र यादव की बात को भी गंभीरता से लिया जा रहा है। यादव पहले ही कह चुके हैं कि मामले में न्याय होना चाहिए, मामले में छेड़छाड़ ही नहीं कुछ और भी है।
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