संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुखप्रीत सिंह की अदालत ने बहादुरगढ़ के सांखोल गांव में औद्योगिक क्षेत्र के नियोजित विकास के लिए अधिग्रहित भूमि का मुआवजा बढ़ाने की मांग खारिज कर दी। अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता अधिग्रहित भूमि का बाजार मूल्य भूमि अधिग्रहण कलेक्टर द्वारा निर्धारित मुआवजे से अधिक होने के संबंध में कोई ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके।
मामला गांव सांखोल की 4 कनाल 4 मरला भूमि के अधिग्रहण से संबंधित है। हरियाणा सरकार ने 27 दिसंबर 2013 को भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 4 के तहत अधिसूचना जारी की थी। भूमि का अधिग्रहण बहादुरगढ़ के सांखोल और कासार गांवों में इंटीग्रेटेड प्लांड डेवलपमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल एस्टेट के लिए किया गया था। भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने 26 अक्तूबर 2016 के अवार्ड में मुआवजा 86 लाख 91 हजार 418 रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया था। याचिकाकर्ताओं ने इसे बढ़ाकर सात करोड़ रुपये प्रति एकड़ करने की मांग की थी।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि भूमि दिल्ली सीमा के निकट, दिल्ली-रोहतक रोड के पास तथा औद्योगिक गतिविधियों वाले क्षेत्र में स्थित है। उन्होंने आसपास की भूमि के बिक्री विलेखों के आधार पर अधिक बाजार मूल्य का दावा किया।
अदालत ने बिक्री विलेखों का परीक्षण करते हुए पाया कि कुछ बिक्री लेनदेन अधिसूचना जारी होने के बाद के थे, जबकि अन्य छोटे भूखंडों से संबंधित थे। एक बिक्री विलेख बहादुरगढ़ की अलग लोकेशन का था। अदालत ने कहा कि छोटे भूखंडों की बिक्री कीमत को बड़े भू-भाग की बाजार कीमत का आधार नहीं बनाया जा सकता, विशेषकर जब दोनों की स्थिति और विकास की संभावनाएं समान सिद्ध न हों। इन्हीं कारणों से अदालत ने मुआवजा बढ़ाने की याचिका खारिज कर दी।