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सुबह से भूखे प्यासे अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए करते हैं इंतजार, निराश होकर लौटना पड़ रहा वापस

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सामान्य अस्पताल के अल्ट्रासाउंड केंद्र के बाहर लाइनों में बैठी महिलाओं व मरीजों के तीमारदारों में स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था से रोष बढ़ता जा रहा है। हर रोज अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए आने वाले मरीजों की लाइन लंबी होती जा रही है। उन्हें हर रोज अगली तिथि दी जा रही है। सामान्य अस्पताल में सभी मरीजों के अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। अल्ट्रासाउंड को लेकर सामान्य अस्पताल में फिलहाल हालात सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं। मरीजों की संख्या काफी अधिक होती है और हर रोज अल्ट्रासाउंड 30 से 40 के बीच हो पा रहे हैं। कई कई दिन तक मरीजों को बारी आने का इंतजार करना पड़ता है। सुबह समय से आकर कार्ड जमा करवा दिया तो अल्ट्रासाउंड हो सकता है। अगर कोई मरीज सोचे की वह दस बजे आकर अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए आए तो उस दिन अल्ट्रासाउंड करवा पाना संभव नहीं है। हर रोज मरीजों की लाइन लंबी होती जा रही है। करीब 100 से 125 मरीज अल्ट्रासाउंड केंद्र पर आ रहे हैं। हर रोज 80 से 90 मरीज बच जाते हैं। जबकि पिछले दिनों के मरीज भी चक्कर लगाते रहते हैं। जिला अस्पताल में दूसरा अल्ट्रासोनोलोजिस्ट नहीं है। केवल एसएमओ डॉ. संजय सचदेवा अल्ट्रासाउंड करते हैं। वह दोपहर के समय एक या दो घंटे तक। इससे पहले वे एसएमओ कार्यालय का काम निपटाते हैं। क्योंकि उन्हें सामान्य अस्पताल के एसएमओ की डीडी पावर भी दी गई है। जबकि वे इस बारे में उच्च अधिकारियों को भी अवगत करवा चुके हैं। लेकिन सामान्य अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करवाने वाले मरीजों की समस्या की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मरीजों को मजबूरी वश निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों से मंहगे भाव में अल्ट्रासाउंड करवाने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
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अल्ट्रासाउंड केंद्र पर कुछ मरीजों की शिकायत उन्हें मिली थी। मरीजों की संख्या अधिक है। अल्ट्रासाउंड करने के लिए व एसएमओ के दोनों काम उन्हें सौंपे गए हैं। सुबह कार्यालय का काम करना पड़ता है। बाद में अल्ट्रासाउंड करते हैं। एक या दो घंटे का समय ही मिल पाता है। उस समय में 30 से 40 अल्ट्रासाउंड हो पाते हैं।
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डॉ संजय सचदेवा, एसएमओ, सामान्य अस्पताल, झज्जर।
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